जौनपुर। अविरल गंगा-निर्मल गंगा की समस्या और समाधान विषय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता महात्मा गांधी ग्रामोद्योग विश्वविद्यालय चित्रकूट मध्यप्रदेश के कुलपति प्रो. कृष्ण बिहारी ने कहा कि भारत में गरीब भूख से नहीं प्यास से मरेगा। उन्होंने गंगा नदी के प्रदूषण की स्थिति पर कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की चली तो वह देश के नदियों को समाप्त कर सभी को बोतल का पानी पिलाएंगे।
टीडी महिला पीजी कालेज में आयोजित संगोष्ठी में प्रो. बिहारी ने कहा कि मदन मोहन मालवीय पहले से ही गंगा की गंदगी को लेकर चिंतित थे। इसके लिए उन्होंने ब्रिटिश काल में ही इलाहाबाद हाईकोर्ट से आदेश पारित करा लिया था कि कोई व्यक्ति या देश, प्रदेश और उद्योग गंगा में कचरा नहीं फेंक सकता। आदेश आज भी अस्तित्व में है लेकिन सरकारें इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं। औद्योगीकरण के नाम पर गंगा को गंदा किया जा रहा है। गंगा को मां कहने वाले साधु संत भी गंगा को गंदा करने में पीछे नहीं है। कुंभ के मेले में यही साधु संत करोड़ों टन कचरा मल गंगा में डालते हैं। समाज और देश में इसको लेकर कितनी संवेदन हीनता है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनाें संत जो आमरण अनशन कर रहे हैं उस पर समाज और देश का ध्यान जा रहा है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डीडी दुबे ने गंगा प्रदूषण गलत जीवन शैली, त्रटिपूर्ण योजना और असंतुलित विकास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि नदियां हमारी स्थलीय पर्यावरण तंत्र की शीरा धमनी हैं। इसको सुरक्षित और शुद्ध रखना हमारा कर्तव्य है। इस मौके पर कैप्टन टीएन सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सूर्य प्रकाश सिंह मुन्ना आदि ने संगोष्ठी को संबोधित किया। सविता अंशुमान ने संगोष्ठी में गीत प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में टीडी पीजी कालेज के प्रबंधक अशोक सिंह, डा. राधेश्याम सिंह, कैलाश नाथ, डा. पीसी विश्वकर्मा, सुरेश, आदित्य, डा. एचसी पुरोहित, कंचन सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।