जौनपुर । पूर्व सांसद का पर्चा निरस्त होने की खबर मिलने से उमाकांत के समर्थकों में मायूसी छा गई। हालांकि उमाकांत के बेटे रविकांत यादव ने भी इसी संसदीय क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया है। माना जा रहा है कि पर्चा निरस्त होने का अंदेशा पहले से ही होने के कारण उमाकांत ने अपने बेटे का नामांकन दाखिल कराया था। अब जौनपुर संसदीय क्षेत्र से 24 प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां से कुल 25 लोगों ने पर्चा दाखिल किया था। हालांकि 28 अप्रैल तक नामांकन वापस लेने का समय है। अगर किसी प्रत्याशी ने अपना पर्चा वापस लिया तो प्रत्याशियों की संख्या और भी कम हो सकती है।
पर्चा निरस्त होने की वजह यह है कि उन्हें न्यायालय से सजा हो चुकी है। पूर्व सांसद उमाकांत के खिलाफ सजा भले ही सात फरवरी 2012 को सुनाई गई पर वह पहले से ही जेल में थे। जिस दिन कोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर की, उस दिन तक वह छह साल दो माह की सजा काट चुके थे। उन्होंने सेशन कोर्ट में सजा कम करने की अपील दाखिल की थी। उनकी अपील सुनवाई के लिए मंजूर कर ली गई है। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की थी कि जमानत दे दी जाए अगर सेशन कोर्ट से उनकी सजा कम नहीं की गई तो वह बाकी बची दस महीने की भी सजा जेल में काट लेंगे। कोर्ट ने दया दिखाई और उन्हें जमानत मिल गई।