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शराब के दस माफिया, 14 अड्डे और बेबश विभाग

Sun, 20 Oct 2013 05:39 AM IST
Jaunpur
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जौनपुर। जिले में मिलावटी शराब का बड़ा कारोबार है। यहां कच्ची और पक्की दोनों तरह की शराब तैयार होती है। पक्की का अवैध कारोबार कम है और कच्ची का ज्यादा। आबकारी विभाग की रिपोर्ट है कि जिले में दस शराब माफिया हैं और 14 अवैध अड्डे चल रहे हैं। दो स्थानों पर शराब की रीफिलिंग और 12 स्थानों पर मिनी डिस्टलरी संचालित होती है। आठ ईंट भट्ठों पर भी अवैध देशी डिस्टलरियां चल रही है। दबंगई के चलते विभाग के लोगों की कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं होती। आबकारी अधिकारी मानते हैं कि यहां छापा डालना खतरे से खाली नहीं है। इस नाते वह आसपास के इलाकों में छापेमारी कर दबाव तो बना लेते हैं लेकिन इन चिन्हित स्थानों पर नहीं जाते। कागज पर इन क्षेत्रों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है।
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आजमगढ़ में जहरीली शराब से मौतों के बाद आबकारी विभाग हरकत में आया हैै। शराब माफियाओं और अवैध दारू अड्डों की फाइल एक बार फिर निकाली गई है। यह पता लगाने की कोशिश की गई कि ताजा स्थिति क्या है। फाइल में दर्ज आंकड़े दो वर्ष पुराने हैं। यह तब तैयार किए गए थे जब कनकपुर और डीह जहनियां में शराब से दो मौतें हुई थी। उसके बाद न तो आंकड़े अपडेट किए गए और न ही नए दारू अड्डों की खोज की गई। शराब माफिया की सूची में दस लोगों के नाम दर्ज हैं लेकिन इनके नाम का खुलासा करने से आबकारी अधिकारी भी कतराते हैं। कहते हैं कि नाम छिपा रहे तो अच्छा है। रिपोर्ट है कि आजमगढ़ की सीमा से सटे केराकत, जैगहां, मानीकला और गौराबादशाहपुर में शराब के अवैध अड्डे संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा खुटहन के लवायन और अहिर खेतार गांव में दूसरे प्रांतों से लाई गई शराब बेची जाती है। कच्ची शराब के अड्डे सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के सोनिकपुर, जमुहाई, हड़ही, कोहणा, कयार, सुजानगंज क्षेत्र के रसिकापुर, सुजानगंज, सोनहिता, मुंगराबादशाहपुर के सुहासा, मीरगंज, जंघई, धर्मापुर, तेजी बाजार में संचालित हो रहे हैं। यह सभी अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। यहां छापेमारी करना खतरे से खाली नहीं है। ऐसा आबकारी अधिकारी का कहना है। यहां शराब के धंधे से जुड़े लोग अफसरों के साथ दुर्व्यवहार कर चुके हैं। कई बार आबकारी इंस्पेक्टर बंधक बनाए जा चुके हैं। इस नाते इन क्षेत्रों में आबकारी टीम जाने से भी कतराती है। इनके आसपास के गांवों में छिटपुट कार्रवाई कर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। आबकारी विभाग ने शराब के लिए कुख्यात शहर से सटे धरनीधरपुर को अपनी सूची से मुक्त कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि अब यहां अवैध कारोबार लगभग बंद हो चुका है। विभाग के पास ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि इन अड्डों से राजस्व को कितना नुकसान हो रहा है।
जिले में सालाना देशी शराब की खपत 50 लाख लीटर, बीयर बीस लाख बोतल (650 एमएल) और अंग्रेजी शराब पंद्रह लाख बोतल (750 एमएल) खपत होती है। इस शराब से 133 करोड़ रुपये का टैक्स मिलता है।
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