जौनपुर। जिले की 70 फीसदी ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां पंचायत भवन नहीं हैं। वहीं पंचायती राज विभाग अब गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी खोलने की तैयारी में है। सवाल उठता है कि जब भवन ही नहीं है तो लाइब्रेरी कहां खुलेगी..? पंचायत भवन नहीं होने से ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता है। मजबूरन लोगों को किसी भी सरकारी काम के लिए या तो ब्लॉक मुख्यालय या फिर शहर जाना पड़ता है। जिले में 1734 ग्राम पंचायत हैं। अमर उजाला की पड़ताल में पाया गया कि इनमें 70 फीसदी यानी करीब 1215 ग्राम पंचायत ऐसे हैं जहां आज तक पंचायत भवन नहीं बन सका है। कहीं जर्जर हाल में है, जिसका उपयोग नहीं हो सकता है। कुछ ग्राम पंचायतों में भवन निर्माणाधीन हैं। जबकि शासन द्वारा प्रत्येक पंचायत भवन के निर्माण के लिए 17 से 20 लाख रुपये का बजट भी ग्राम पंचायतों को मुहैया कराया गया है।
ढाई साल बाद भी अधूरा है पंचायत भवन-बदलापुर। भटेहरा ग्राम पंचायत के मदापुर में 2.50 वर्ष बाद भी पंचायत भवन अधूरा है। प्रधान उपेंद्र यादव ने बताया कि बजट के अभाव में निर्माण कार्य प्रभावित है। इस कारण ग्रामीण परेशान हैं।
सलारपुर में अधूरी दीवार छोड़ी -विकासखंड मडियाहूं के ग्राम पंचायत सलारपुर में नींव से 4 फीट तक दीवार बना कर छोड़ दी गई है। शेष कार्य अभी बाकी है। सहायक विकास अधिकारी पंचायत प्रदीप कुमार ने बताया कि जल्द ही बाकी काम पूरा करवा कर उसमें काम शुरू करवा दिया जाएगा।
पहले चरण में 459 लाइब्रेरी खोलने की तैयारी -पंचायती राज विभाग की ओर से पहले चरण में 459 डिजिटल लाइब्रेरी के बनाने के शासन की ओर से प्रस्ताव भेज दिया गया है। विभाग का दावा है कि ये लाइब्रेरी उन गांवों में बनेगी जहां पंचायत भवन हैं। बजट जारी होने पर कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को इंटरनेट, कंप्यूटर और अन्य आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
ये है पंचायत भवन-पंचायत भवन, ग्राम पंचायत का कार्यालय होता है। जहां पंचायत की बैठकें होती हैं और ग्राम स्तर पर पंचायत सचिव की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इसका निर्माण ग्राम पंचायतों के कार्यालय, बैठकों के आयोजन, और पंचायत सचिव के आवास के लिए किया जाता है। इसमें एक बैठक कक्ष, कार्यालय कक्ष, कर्मी आवास, बरामदा और शौचालय होते हैं। यहां से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और जरूरी कागजात बनवाने में मदद की जाती है।
कुछ ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का निर्माण अधूरा है। इसे पूरा करवाया जाएगा। साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी के लिए भी शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मिलने पर काम करवाया जाएगा। - नत्थु लाल, डीपीआरओ