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माता पिता की सेवा से ही जीवन होता है सुखी: प्रमोद दास

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सिरकोनी। कथा वाचक प्रमोद दास महाराज ने कहा कि माता पिता की सेवा से जीवन सुखी बनता है। माता पिता की आज्ञा का पालन सबसे बड़ी सेवा है। जो लोग माता पिता को अपने आचरण से प्रसन्न रखते हैं उन्हें संत और भगवंत की प्रसन्नता जल्दी मिल जाती है। विकास खंड के राजेपुर गांव में मां वनसत्ती इंटर कालेज में चल रहे श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रचवन कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि जो मां बाप का दिल दुखाते हैं उनके जीवन से सुख चला जाता है। एक छोटी कहानी सुनाई कि एक बार एक बेटे ने मां को घर से इसलिए बाहर का रास्ता दिखा दिया क्योंकि उसकी मां के एक आंख थी। जिससे बेटे को अपमान लगता। कुछ वर्ष बाद यह पता चला कि बेटे की बचपन में दुर्घटना से एक आंख नष्ट होने पर मां अपने लाल को अपनी आंख दे दिया था। जिस मां ने बेटे को दुनियां देखने योग्य बनाया उसी मां को बेटे ने घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। भारतीय जीवन की सबसे छोटी और सबसे महत्वपूर्ण इकाई परिवार है। यदि पारिवारिक व्यवस्था नष्ट हुई तो सामाजिक एवं राष्ट्रीय संस्कार प्रभावित होंगे। इसलिए परिवार का बेहतर संस्कार ही बेहतर राष्ट्र की नींव है। प्रभु श्रीराम ने लीला करके भारतीय परिवार व्यवस्था के परम आदर्श बनते हुए राष्ट्र जीवन के परम आदर्श बनें। इसलिए परिवार, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन की आधारशिला है।
प्रभु की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए ऽ ‘कौशिल्या के गोद खिलौना हो कहु नजर न लगे’ भजन सुन कर भक्तजन भव विभोर हो गए। व्यास पूजन रामेश्वर प्रसाद, मंजू, वासुदेव यादव, राम चरन, बद्री नारायण चौबे, महेंद्र प्रजापति, कमलेश, परमेश्वर प्रसाद ने किया। कथा आयोजक रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि शुक्रवार को भगवान राम का विवाह महोत्सव मनाया जाएगा।
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