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Jaunpur News: 55 हजार किशोरियों को लगेगा सर्वाइकल कैंसर से बचाव का टीका

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जौनपुर। किशोरियों में होने वाले सर्वाइकल से बचने के लिए अभियान शुरू किया जाएगा। जिले की 55 हजार किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए टीकाकरण करने की तैयारी है। प्रदेश स्तर पर चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। स्वास्थ्य इकाइयों में प्रशिक्षण देकर अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में इसके मरीज मिलते हैं। इससे बचाव के लिए किशोरियों को समय-समय पर जागरूक भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण के लिए पहल शुरू कर दी है। जिले के चिकित्सकों को लखनऊ में बुलाकर प्रशिक्षण दे दिया गया है। अब जिला और ब्लाॅक स्तर पर चिकित्सकों को टीकाकरण के बारे में प्रशिक्षण दिया जाना बाकी है। जिला स्तर पर प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। जिला स्तर पर प्रशिक्षण लेने के बाद चिकित्सक ब्लाॅक स्तरीय स्वास्थ्य इकाइयों पर जाकर चिकित्सकों को प्रशिक्षण देंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वैक्सीन मिलने के बाद जिले में टीकाकरण का काम शुरू करा दिया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाॅ. एनके सिंह ने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) किशोरियों में सर्वाइकल कैंसर का कारण बन रहा है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन का निशुल्क सुरक्षा कवच देने की तैयारी है। यह अभियान शीघ्र ही शुरू होगा। उम्मीद है कि इस जीवन रक्षक टीके के माध्यम से बच्चियों को कैंसर से बचाया जा सकेगा। टीका उपलब्ध होने के बाद अभियान शुरू कर दिया जाएगा। यह देखा गया है कि 14 से 15 साल के बीच की आयु की किशोरियों में सर्वाइकल कैंसर आम हो गया है। सरकार की पहल है कि इस आयु की किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन का निशुल्क सुरक्षा कवच देकर बच्चियों को कैंसर से बचाया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण शुरू हो गया है। अब जिले और ब्लाॅक स्तर पर डाक्टरों और स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 14 से 15 वर्ष की लड़कियों के लिए टीका आने की तैयारी है। देश में हर आठ मिनट में एक महिला गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) से जान गंवा रही है। एक शोध में बताया गया है कि सालाना लगभग 1.23 लाख नए मामले और 77 हजार मौतें इस गंभीर स्थिति का प्रमाण हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर स्क्रीनिंग और ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का टीकाकरण इस घातक बीमारी को रोकने में कारगर हैं।
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