गोमती नदी का पानी अब हाथ धुलने लायक भी नहीं रहा। इसका खुलासा स्वच्छ गंगा रिसर्च लेबोरेटरी वाराणसी की जांच में हुआ है। जांच रिपोर्ट में नदी के पानी का टोटल डिसाल्वड सालिड (टीडीएस) 520 तक पहुंच गया है। जो तय मानक से
बहुत अधिक है। नदी के जल का फेकल कोलीफार्म काउंट (एफओसी) अधिकतम (150-500) तक होना चाहिए जो मौजूदा स्थिति में 240000 तक पहुंच गया है। यही कारण है कि नदी के किनारे के गांवों में संक्रामक बीमारियां तेजी से पैर
पसारना शुरू कर दी हैं। स्वच्छ गोमती अभियान अविरल गोमती की मांग पर संकट मोचन फाउंडेशन और बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में कैमकाप्टर से 15 अक्तूबर को नदी में सीधे गिरने वाले शहर के कई प्रमुख नालों की रिकार्डिंग के
बाद बजरंग घाट, हनुमान घाट, केरारवीर नाले के पास सहित कई घाटों से नदी के पानी का सैंपल लिया गया था। पानी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता, महामंत्री विकास शर्मा और
संयोजक डा. राजवीर सिंह ने चिंता जताते हुए कहा है कि नदियों में फैल रहा प्रदूषण घातक रूप ले चुका है। बजरंग घाट :स्लाटर हाउस के नाले का यहां पानी गिरता है। यहां नदी के पानी का टीडीएस 520 और एफसीसी 240,000 तक पहुंच
गया है। हनुमान घाट: यहां शहर के कई नाले आकर मिलते हैं। जिनका पानी नदी में बहाया जा रहा है। यहां पानी का टीडीएस 500 है जबकि एफसीसी 160,000 पहुंच गई है।
केरारवीर: नालों का पानी यहां नदी में गिरता है जिसकी वजह से यहां पानी का टीडीएस 548 और एफसीसी 120,000 तक पहुंच गया है।