लोकसभा चुनाव में प्रचार की जंग अपने चरम पर है। प्रत्याशियों की पत्नियां, बेटे, रिश्तेदार आकर चुनाव संभाल रहे हैं। प्रत्याशियों ने अपने रिश्तेदारों और परिवारवालों को स्विट्जरलैंड और इंडोनेशिया सहित विदेशों से बुला लिया है। जो चुनावी कमान संभाल रहे हैं। सरकारी नौकरी पेशा लोग भी छुट्टी लेकर अपनी दोस्ती और रिश्तेदारी निभाने के लिए रात दिन प्रचार में जुटे हैं।
प्रत्याशी सुबह से लेकर रात तक प्रचार में जुटे हैं। 12 मई को मतदान होना है। ऐसे में उनके पास अब समय नहीं है। सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी पूरी ताकत प्रचार में झोंके हुए हैं। लोकसभा चुनाव में परिजनों व रिश्तेदारों ने भी चुनावी जिम्मेदारी संभाल ली है। जौनपुर सदर से कांग्रेस प्रत्याशी देवव्रत मिश्र की पत्नी रीना मिश्रा दिल्ली से आई हैं। उनकी बहन दिव्या मिश्रा अमेरिका से, एक रिश्तेदार दीपाली शुक्ला स्विट्जरलैंड से और एक उनके मित्र इंडोनेशिया से आकर रात दिन चुनाव प्रचार में जुटे हैं।
सांसद केपी सिंह की पत्नी भी महिलाओं की टीम लेकर भाजपा महिला नेत्रियों के साथ डोर टू डोर जनसंपर्क कर रही हैं। बसपा-सपा गठबंधन के प्रत्याशी श्याम सिंह यादव के पुत्र पार्थ छुट्टी लेकर प्रचार में जुटे हैं। श्याम सिंह के बड़े भाई धरम सिंह की पत्नी, उनके छोटे भाई तेज सिंह की पत्नी चुनावी प्रचार में जुटी हैं। निर्दल प्रत्याशी अशोक सिंह का पूरा परिवार भी मुंबई से आकर चुनाव प्रचार कर रहा है। मछलीशहर के भाजपा प्रत्याशी वीपी सरोज के परिवार के लोग भी चुनाव प्रचार में जुटे हैं।
बसपा-सपा गठबंधन के प्रत्याशी त्रिभुवन राम के पुत्र रजक सिंह सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं। उनके भाई सुमन प्रताप, आरबीआई के रिटायर्ड अधिकारी रिजुहन राम मुंबई से और मित्र राजीव माहेश्वरी भी सुबह से लेकर शाम तक धुंआधार प्रचार कर रहे हैं। चुनाव में किसी की पत्नी तो किसी का बेटा तो किसी का भाई प्रचार की कमान संभाले हुए हैं।