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दर्पण में देखा ओ शीशे टूट जाते हैं, अब तो आंखो से मानो...

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केराकत। अक्षर आरसी साहित्य संस्था की ओर से बुधवार की रात नरहन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को हंसाया-गुदगुदाया तो सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर प्रहार भी किया। गोष्ठी की शुरुआत करते हुए पवन कुमार पांडेय ने ‘दर्पण में देखा ओ शीशे टूट जाते हैं, अब तो आंखो से मानो झरने फूट जाते हैं...’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। साहब लाल सहज ने ‘रतियां अंधरिया उजियार कब होई, बगिया सुखल कचनार कब होई... को श्रोताओं ने खूब सराहा। नंदलाल समीर ने स्कूल क छत गिर गइल, वृक्षारोपण का सारा पौधा बकरी चर गिर गई... सुनाकर भ्रष्टाचार पर प्रहार किया। डा. बहादुर अली खान मिनाई ने बुलंद हौसला दिल में ख्वाब रखिए, जहां अंधेरा हो वहां चिराग रखिए... पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाई। इसी क्रम में श्रीपति सिंह गौतम, बृजेश लहरी, मो. इकबाल, रामधनी आनंद, गुलाम सर्वर, गुल्ली पांडेय आदि की रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुन्ना दीक्षित एवं विशिष्ट अतिथि अनूप चंद पांडेय रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदन मोहन शुक्ल और संचालन डॉ. बहादुर अली खान ने किया।
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