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शहर से गांव तक सड़कों पर हैं मौत के गड्ढे

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जौनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष 22 जून तक ही सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के डेढ़ साल बाद भी जिले में सड़कों की दशा नहीं सुधरी आज भी लोग सड़कों पर हिचकोले खाने को विवश हैं। शहर से लेकर गांव तक की सड़कों पर कदम कदम पर गड्ढे हैं। जिससे आएदिन हादसे हो रहे हैं। दुर्दशा की शिकार इन सड़कों पर नियमित यात्रा करने वाले यात्री स्पांडिलाइटिस और सर्वाइकल जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। सर्दी के मौसम में कोहरे के बीच इन सड़कों पर हादसों की संभावना और भी बढ़ जाएगी। करीब 50 लाख से भी अधिक आबादी वाले इस जिले में सड़कों पर गड्ढों को भरने के लिए अभियान जरूर चलाया गया लेकिन अभियान रफ्तार नहीं पकड़ सका। जिम्मेदार अधिकारी कभी बजट न होने का रोना रोते हैं तो कभी सड़कों पर बने गड्ढों को जल्द भरने का दावा करते हैं। जिले में आवागन को सुगम बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से 3854 सड़कों का निर्माण कराया गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 6245 किलोमीटर है। सड़कों के इस जाल में 263 किलोमीटर राजमार्ग हैं जबकि 93 किलोमीटर प्रमुख जिला मार्ग हैं। ग्रामीण मार्गों की कुल लंबाई 4800 किलोमीटर है। सरकार के फरमान के बाद जून 2017 में लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़कों की कराई गई पड़ताल में पाया गया था कि 1255 किलोमीटर सड़कें गड्ढे में तब्दील हो चुकी हैं। लोक निर्माण विभाग के तीन अलग अलग खंडों के पास सड़कों का रखरखाव और उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी है। लेकिन इन सड़कों की सूरत मुख्यमंत्री के अल्टीमेटम के डेढ़ साल बाद भी नहीं बदल सकीं। नतीजा यह कि दुर्दशाग्रस्त सड़कों पर सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है। गड्ढों में तब्दील सड़कों पर चलने वाले दैनिक यात्री सर्वाइकल और स्पाइंडलाइटिस जैसी बीमारी के शिकार हो रहे हैं और सड़क पर होने वाले हादसों में लोगों की जान तक चली जा रही है। पिछले एक महीने के भीतर हुए सड़क हादसों पर गौर करें तो जिले में हर दूसरे दिन किसी न किसी की जान सड़क हादसे में जा रही है।
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