जौनपुर। जिले के 3217 राजस्व गांवों में छुट्टा पशु किसानों के लिए सिरदर्द बन चुकें है। खेती को चौपट कर रहे छुट्टा पशुओं की संख्या 10 हजार से भी अधिक होगी। अपनी गाढ़ी कमाई को बचाने के लिए किसान इस ठंड में रात को भी फसलों की रखवाली करने को विवश हैं। इससे किसानों का गुस्सा चरम पर है। छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए सरकार की ओर से जल्दी कोई उपाय नहीं किए गए तो किसानों की गुस्सा कभी भी फूट सकता है। अब जगह जगह किसान छुट्टा पशुओं को प्राथमिक विद्यालय भवन की बाउंड्री में बंद कर दे रहे हैं। जिले में आठ से अधिक स्थानों पर प्राइमरी स्कूल में छुट्टा पशुओं को ग्रामीण बंद कर चुके है। एक गांव के लोग तो दूसरे गांव में ऐसे पशुओं को छोडऩे जा रहे थे तो पुलिस ने उन्हें पशु तस्करी में पकड़कर चालान कर दिया।
प्रिभारी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा था कि न्याय पंचायत स्तर पर गौशाला स्थापित कराई जाएगी। लेकिन एक पखबारा बीत गया कोई इंतजाम नहीं हो सका। जिले में कुल पांच लाख 66 हजार किसान हैं। जिले में कोई भी ऐसा गांव नहीं है जहां के किसान छुट्टा पशुओं से परेशान न हों। जब कभी किसान गांव में खेती को चौपट कर रहे छुटट पशुओं को कहीं बाहर ले जाने की कोशिश करते हैं तो पुलिस परेशान करती है। अभी कुछ दिन पहले ही बक्शा थाना क्षेत्र के मई गांव के किसानों ने 42 छुट्टा पशुओं को एक बगीचे में बांध दिया था। किसान शाम को इन छुट्टा पशुओं को बाहर छोडने ले जा रहे थे। रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। और गोवध अधिनियम में केस दर्ज कर जेल भेज दिया। ऐसे में अब इन किसानों ने नया तरीका ढूंढ लिया है। छुट्टा मवेशियों को एकत्र कर गांव के प्राथमिक विद्यालय में बंदकर ताला लगा दे रहे हैं। इसकी सूचना पर प्रशासन इन मवेशियों को विद्यालय से निकाल कर गौशाला पहुचा रहा है। सिरकोनी विकास खंड के धनेजा, शिवपुर, सिकरारा इलाके में आठ से अधिक विद्यालयों में किसान छुट्टा मवेशियों को बंद कर कर चुके हैं। बक्शा के किसान रामकरन यादव कहते हैं कि रात में भी छुट्टा पशुओं से फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजनाथ यादव कहते हैं कि छुट्टा पशु किसानों के सामने बड़ी समस्या बन गए हैं। सरकार इनके लिए कोई कारगर कमद नहीं उठाएगी तो किसान सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।