जिले के सात सरकारी विभागों पर जल और गृह कर का 27.94 लाख रुपए कई सालों से बकाया है। समय से कर का भुगतान किया गया होता तो पालिका प्रशासन उस राशि से ट्यूबवेल लगाने से लेकर सड़कों की मरम्मत का कार्य करता। नोटिस के बाद भी बकाएदार विभागों के अधिकारियों पर जू तक नहीं रेंगी।
नगर पालिका द्वारा विभागों व संस्थानों सहित आम लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही भवनों का टैक्स भी लिया जाता है। इस पैसे का उपयोग नगर क्षेत्र के विकास में किया जाता है। चाहे वह सड़क बनाना हो, सफाई कराना हो व पानी मुहैया कराने और स्ट्रीट लाइट लगाने आदि का कार्य किया जाता है।
नगर पालिका के आंकड़ों पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2015-16 का गृह व जलकर अभी तक सात विभागों के यहां लगभग 27 लाख रुपए बकाया है। इसमें सिंचाई विभाग के यहां दो लाख 10 हजार, बीएसएनएल के यहां नौ लाख 96 हजार 849, एक कोर्टका 66 हजार 678, आरईएस के यहां एक लाख 83 हजार 821, सीडीओ कार्यालय के
यहां तीन लाख 83 हजार 249, जिला अस्पताल के यहां छह लाख 29 हजार व पशु अस्पताल के यहां तीन लाख 25 हजार रुपए बकाया है। हालत यह है कि इन विभागों से कर वसूलने के लिए नगर पालिका द्वारा जनवरी व फरवरी में नोटिस भेजा गया था।
इसके बाद भी विभागों द्वारा अभी तक बकाया धनराशि नहीं जमा किए हैं। उधर नगर पालिका भी विभागों के यहां बकाया वसूलने के लिए काई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।बता दें कि कर वसूलने के लिए पहले नोटिस भेजा जाता है। इसके बाद भी कर जमा नहीं करने वाले के विरुद्ध आरसी भेजने की कार्रवाई की जाती है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।