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मजबूत बुनियाद से खड़ी हो रही शिक्षा की सुदृढ़ इमारत

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जौनपुर। करीब 50 लाख की आबादी वाले जिले में 2416 प्राथमिक विद्यालय, 878 जूनियर हाईस्कूल, 150 वित्तपोषित माध्यमिक विद्यालय और 176 डिग्री कालेज हैं। खास तौर से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में पिछले एक साल में जो बदलाव आए हैं, वह शिक्षा की सुदृढ़ इमारत खड़ी करने की दिशा में एक शुभ संकेत हैं। बच्चों को प्राइमरी विद्यालयों में दाखिला कराने के लिए लोगों का रुझान बढ़ा है। परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की बढ़ती संख्या इस बात की गवाह है। गौर करें तो वर्ष 2017 में जिले के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या 3.82 लाख थी जो 2018 में बढ़कर 3.85 लाख हो गई। डॉप आउट बच्चों का कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। बीएसए डॉ. राजेंद्र सिंह की मानें तो ग्रेड लर्निंग स्कूल की व्यवस्था से भाषा और गणित विषय में बच्चों के शैक्षणिक स्तर में काफी सुधार आया है। नई व्यवस्था के तहत जिले में 132 इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय और 210 अभिनव विद्यालय चल रहे हैं। परिषदीय विद्यालय के बच्चों को मुफ्त में मध्याह्न भोजन के साथ किताबें, युनिफार्म, स्वेटर, बैग, और जूत-मोजे भी दे दिए जा रहे हैं। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए टास्क फोर्स गठित कर विद्यालयों की रैंडम चेकिंग अभियान चलाकर शिक्षकों की नकेल कसी जा रही है। जिले में माध्यमिक विद्यालयों शिक्षकों की कमी को इस साल भी पूरा नहीं की जा सकी, जिससे पठन-पाठन में अपेक्षा के अनुरूप सुधार नहीं हो पा रहा। जिले के 612 माध्यमिक विद्यालयों में 913 अध्यापकों की कमी है। वर्ष 2018 में नए विद्यालय खोलने के लिए कोई प्रस्ताव शासन को नहीं भेजे गए। जिले में कुल 612 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें 31 राजकीय, 150 वित्तपोषित और बाकी स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं। अधिकतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। 150 वित्तपोषित विद्यालयों में 22 विद्यालय ऐसे हैं, जहां प्रिंसिपल ही नहीं है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ब्रजेश मिश्र का कहना है कि जिले के 150 एडेड कॉलेजों के लिए 4988 अध्यापक चाहिए जबकि 4075 अध्यापक ही मौजूद है। ऐसे में तकरीबन 913 अध्यापकों की कमी है। इनमें प्रवक्ता के 733 पदों में से 498 पदों पर ही शिक्षकों की तैनाती है। प्रवक्ता के 235 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा एलटी ग्रेड के कुल 2311 पद हैं जिसमें से 1852 पर तैनाती है। बाकी 449 पद खाली पड़े हैं। लिपिक के 35 और चतुर्थ श्रेणी के 160 पद नहीं भरे जा सके हैं।
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