मछलीशहर कोतवाली क्षेत्र के धनौवा गांव की दलित बस्ती में बुधवार की रात आग ने ऐसी तबाही मचाई कि 20 पविर बेघर हो गए। परिवार के सदस्यों के तन पर मौजूद वस्त्र को छोड़ गृहस्थी का सारा सामान जलकर राख हो गया। उनके पास न तो रहने के लिए अब कोई छत बची है और न ही खाने के लिए अन्न। आग की तेज लपटों के आगे सभी बेबस दिखे।
फायर ब्रिगेड के जवानों ने करीब तीन घंटे बाद रात में एक बजे जब आग पर काबू पाया तबतक पूरी बस्ती राख में तब्दील हो चुकी थी। गुरुवार को सुबह जीरिकपुर के प्रधान संतोष गुप्ता, धनौवा के प्रधान और गांव के अन्य लोगों की मदद से बस्ती में चूल्हा जल सका।
मछलीशहर कोतवाली क्षेत्र के धनौवा गांव की दलित बस्ती के लोगों के पास रहने के लिए घर के नाम पर छप्पर ही था। बुधवार की रात करीब 11 बजे कल्पू के रिहायशी छप्पर में अचानक आग लग गई। शोर मचा तो आस पास के गांव के लोग भी दौड़ पड़े। लोगों ने आग बुझाने का पूरा प्रयास किया लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थी कि आग पर काबू पाने के लिए लोग असहाय थे। देखते ही देखते सुबाष, फूलचंद, संतलाल, दयाराम, राजनाथ, अमरनाथ, रमाशंकर, हीरालाल, मोतीलाल, गुलजारी, हरिशंकर, प्रदीप, जयहिंद, नाविन्द, बुधिराम, सीता, जिलेदार, महंथ, शोभई, यशोदा, नौरंगी के 25 से अधिक रिहायशी छप्पर जलकर राख हो गए।
फायरब्रिगेड ने रात में एक बजे मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक सब कुछ स्वाहा हो चुका था। देर रात में ही तहसीलदार अरविन्द कुमार, लेखपाल बाबूराम यादव मौके पर पहुंचे। क्षति का जायजा लिया और पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिया।