मछलीशहर। अयोध्या से पधारे संत स्वामी मनीष शरण महराज ने कहा कि निर्गुण निराकार परमात्मा भी भक्तों के वशीभूत होकर निराकार से मानव रूप में नर लीला करते हैं। वे क्षेत्र के जमुहर बाजार में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने दाम्पत्य जीवन पर एक सोरठा ‘जल पय सरिस बिकाय देखहु प्रीत की रीत भलि, बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि’ की सुंदर व्याख्या करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी का कोई मूल्य ना होने पर भी दूध में मिल जाने पर दूध के भाव मे बिक जाता है और दूध भी कितना भी पानी मिल जाने पर अपना स्वभाव (सफेदी ) नहीं छोड़ता है। उसी प्रकार पति-पत्नी का दाम्पत्य जीवन होता है। एक दूसरे की कमियों को छिपा कर भी अपने स्वभाव में आत्मसात करना ही जीवन है। कथा के बीच-बीच में श्री हरि कीर्तन व भजनों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते रहे। इस अवसर पर ग्राम प्रधान श्याम सुंदर बिंद, अजय कुमार सिंह, धनंजय सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, कमलेश सिंह, विजय प्रकाश, बीडीसी हरिकेश यादव, सोनू यादव, मनोज विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।