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गोमती नदी के तटपर डंप हो रहा शहर का कूड़ा ..

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जौनपुर। जब रक्षक ही भक्षक बन जाते हैं तो उसकी सुरक्षा आखिर कैसे हो सकती है। आजकल यही हाल गोमती नदी का है। कचरा निस्तारण की व्यवस्था में विफल नगर पालिका प्रशासन शहर का कूड़ा गोमती के तट पर डंप कर रहा है। जगह-जगह कूडे़ के ढेर से गोमती का किनारा पट रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इसके अलावा नदी की सफाई तो दूर नगर पालिका द्वारा कूड़े को भी शहर के बाहर नहीं गिराया जा रहा है। जिसकी वजह से नदी का अस्तित्व संकट में है। इसके अलावा रोज लाखों लीटर गंदा पानी नालों के जरिये गिरने से जीवनदायिनी प्रदूषण से कराह रही है। हजारों वर्षों से गोमती अपने साथ बालू, कंकड़ और उपजाऊ मिट्टी आदि लेकर आती है और अपना भार बाढ़ के डूबे क्षेत्र में छोड़ती हुई आगे बढ़ जाती है। अफसोस यह कि लोगों ने गोमती की कद्र करना छोड़ दिया। उसे मात्र कचरा धोने वाले नाले के समान बना दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नदी में भौतिक, रासायनिक व जैविक प्रक्रियाएं निरतंर चलती रहती है। जो परिस्थितियां सामंजस्य बनाकर रखती हैं। जब उनके मानक का हस्तक्षेप होने लगता है तो संतुलन डगमगा जाता है और नदी अस्वस्थ हो जाती है। सरकार के मंत्री कूड़ा गिराने से नगर पालिका को रोक सकते और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवा सकते हैं। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। स्थिति यह है कि जिस गऊ घाट से शहर में जलापूर्ति के लिए गोमती का पानी लिया जाता है। वहीं एक बड़ा गंदा नाला नदी में आकर मिल रहा है। इस घाट पर पानी में प्रदूषण अधिक है। इसका सबसे बड़ा कारण नालों का गिरना है। शहर में तकरीबन 82 टन कूड़ा हर रोज निकलता है। नगर पालिका के पास कूड़ा निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके चलते नगरपालिका के कर्मचारी नदी के तट पर ही कूड़ा डंप कर रहे हैं। इसकी वजह से नदी कराह रही है और उसकी जीवंतता घट रही है। शहर में गोमती नदी के बलुआघाट, गोपाल घाट, जोगियापुर समेत कई अन्य स्थानों पर नदी के किनारे कचरे के ढेर लगे हुए हैं। नखास मोहल्ले में आस-पास के लोग नदी में ही कूड़ा निस्तारित करते हैं जिससे यहां भी नदी किनारे कूड़ों का पहाड़ बन गया है।
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