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ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं चल रही रोडवेज बसें, यात्री परेशान

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जौनपुर। बसों के चुनाव में चले जाने और लगन शुरु हो जाने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे खराब हालत ग्रामीण क्षेत्रों की है। इन क्षेत्रों में चलने वाली बसों को लंबी दूरी के लिए चलाया जा रहा है। जिससे बसें ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं जा पा रही है। वहीं सड़कों के खराब होने से रोडवेज डिपो में शेष बची बसें भी समय से नहीं पहुंच पा रही है। जबकि प्राइवेट वाहन लगन में बुक हैं। बसों के नहीं मिलने से यात्रियों की जगह-जगह भीड़ जमा हो रही है।
जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से रोज तकरीबन 10 हजार लोग अपने कार्यो से शहर, कचहरी, आफिस सहित अन्य स्थानों के लिए आते हैं। इन लोगों द्वारा रोडवेज और प्राइवेट वाहनों से जिला मुख्यालय आवागमन किया जाता है। लेकिन इस समय जिला मुख्यालय आने जाने में यात्रियों की फजीहत हो जा रही है। कारण डिपो से संचालित होने वाली 93 बसों में से 45 बसें चुनाव में चली गई हैं। जिससे मात्र 48 बसे ही शेष बची हैं। चुनाव बसों के चले जाने के बाद ग्रामीण इलाकों में चलने वाली रोडवेज बसों बंद कर दिया गया है। इन बसों को ग्रामीण क्षेत्रों की बजाय लंबी दूरी गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ आदि स्थानों के चलाया जा रहा है। वहीं इस समय शादी विवाह होने के कारण प्राइवेट वाहन भी नहीं मिल रहे हैं। वाहनों के नहीं मिलने से यात्रियों की भीड़ जगह-जगह जमा हो जा रही है। जिससे यात्री समय से अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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दोपहर के समय डिपो में नहीं रहती एक भी बसें
जौनपुर। बसों के कम होने से दोपहर के समय रोडवेज डिपो में एक भी बसें खड़ी नहीं रहती हैं। जबकि यात्रियों की भीड़ लगी रहती है। कई यात्री जेसीज चौराहे पर तो कई यात्री वाजिदपुर तिराहा, पालिटेक्निक और सिपाह आदि स्थानों पर बस आने का इंतजार करते हैं। इस दौरान वे धूप में खड़े होकर बसों के आने की राह देखते हैं।

डिपो में बैठने व पेयजल आदि की नहीं है सुविधा
जौनपुर। रोडवेज डिपो में यात्रियों के बैठने व पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। यात्री खड़े होकर या फिर जमीन पर बैठ कर बसों का इंतजार करते हैं। जिससे उनको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वे पेयजल के लिए इधर-उधर भटकने को विवश हैं।
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बसों के चुनाव में चले जाने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली बसों को बंद कर दिया गया है। उनको लंबी दूरी के लिए भेजा जा रहा है।बसों के डिपो में आते ही जहां के अधिक यात्री रहते हैं। बसों को वहां के लिए फिर भेज दिया जाता है।
केशरी नंदन चौधरी
एआरएम रोडवेज
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