जौनपुर। शहर से लेकर गांवों तक सौ से ज्यादा छोटे-बड़े कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें पांच संस्थान तो पंजीकृत हैं। ज्यादातर कोचिंग सेंटर
बहुमंजिली इमारतों में संचालित हो रहे हैं। सूरत में कोचिंग संस्थान में अगलगी के हादसे के बाद डीजी फायर विश्वजीत महापात्रा ने ऐसे कोचिंग संस्थानों की जांच करने का निर्देश प्रदेश के सभी मुख्य अग्निशमन अधिकारियों दिए हैं। इससे कोचिंग संचालकों में खलबली मची है क्योंकि इक्का-दुक्का कोचिंग संस्थानों को छोड़ दें तो अधिकांश में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
शहर के वाजिदपुर चौराहा, ओलंदगंज, रूहट्टा, सिपाह आदि मुहल्लों में तमाम कोचिंग सेंटर हैं। उनमें से ज्यादातर तीसरी और चौथी मंजिल पर संचालित किए जा रहे हैं। उनके पास न तो अग्निशमन यंत्र है और न ही अन्य कोई इंतजाम है। फायर ब्रिगेड से इन केंद्रों ने एनओसी तक नहीं ली है और न ही फायर ब्रिगेड कभी कोई कार्रवाई करने की जरूरत समझता है। फायर ब्रिगेड के पास भी बहुमंजिली इमारतों में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं। फायर बिग्रेड के पास 35 फुट की सीढ़ी है लेकिन चौथी और पांचवीं मंजिल पर पहुंचने के इंतजाम नहीं है। कोचिंग संचालकों का कहना है कि अग्निशमन के इंतजाम करने का कोई नियम कोचिंग संस्थानों के लिए नहीं है। प्रति छात्र 100 रुपये ट्रेजरी शुल्क जमा करने के बाद पंजीकरण हो जाता है। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. वृजेश मिश्र का कहना है कि 50 केंद्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि तकरीबन इतना ही आवेदन अभी लंबित है। स्कूलों की मान्यता के लिए फायर एनओसी जरूरी है लेकिन कोचिंग संस्थानों के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है।
सूरत की घटना के बाद डीजी फायर के निर्देश पर ऐसे कोचिंग संस्थानों को चिहिंत किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर फायर मुख्यालय को भेजी जाएगी। निर्देश प्राप्त होने के बाद कार्रवाई की जाएगी। -आरपी राय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी