जौनपुर। डा. वीएस उपाध्याय ने कहा कि गठिया घुटनों के जोड़ के साथ आंतरिक अंगों और त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकता है। मोटापा, गलत खानपान के चलते यह रोग युवाओं को भी हो रहा है। वह आशादीप हास्पिटल में आयोजित आर्थराइटिस जांच व जागरूकता शिविर में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि बदन में दर्द, अकड़न, हाथों, कंधों और घुटनों में भी सूजन और दर्द गठिया के लक्षण हो सकते हैं। शुरुआत में मरीज को बार-बार बुखार भी आता है, मांसपेशियों में दर्द रहता है और थकान महसूस होता है। यह आजीवन रहने वाली बीमारी है। ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। वजन को कम रखें और सुबह गुनगुने पानी से नहाएं। जैतून के तेल से मालिश करने से गठिया की पीड़ा कम होती है। सै. मोहम्मद मुस्तफा, शत्रुघन मौर्य, शकील अहमद, अरुण त्रिपाठी, महेन्द्र नाथ सेठ, अशवनी बैंकर, सुरेश चन्द्र गुप्ता, राम कुमार, संजय सिंघानिया, परमजीत सिंह, ममता उपाध्याय, शैल मौर्य, गायत्री आदि मौजूद रहे।