मछलीशहर। क्षेत्र के बटनहित गांव में चल रही श्रीमद्भावत कथा में चौथे दिन अयोध्या के संत स्वामी मनीष शरण महाराज ने भगवान और भक्त के संबंध की प्रगाढ़ता का बखान किया। कहा कि अपने भक्तों की रक्षा के लिए परमात्मा किसी भी रूप को धारण कर तत्काल पहुंच जाते हैं। प्रेम के वशीभूत होकर प्रभु अपने भक्त को दर्शन देते हैं। उन्होंने प्रह्लाद के माध्यम से भक्ति के प्रभाव का बखान किया। कहा कि दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए लेकिन भक्त प्रह्लाद को डिगा नहीं सका। क्षेत्र के बटनहित गांव में चल रही श्रीमद्भावत कथा के चौथे दिन उन्होंने प्रह्लाद की भक्ति को रेखांकित किया। कहा कि हिरण्यकश्यप प्रह्लाद का बाल बांका नहीं कर सका। अपने भक्त को संकट में देखकर भगवान नृसिंह के रूप में प्रकट होते हैं और हिरण्यकश्यप का वध कर देते हैं। भक्त् प्रह्लाद के चरित्र से हमें शिक्षा लेनी चाहिए। भगवान पर पूर्ण विश्वास करना चाहिए। भक्तों का अगाध प्रेम और अटूट विश्वास भगवान को किसी भी रूप में आने को विवश कर देता है। इस मौके पर राधेश्याम पांडेय, संजय शुक्ला, पं. सुरेश दुबे और आशीष तिवारी आदि मौजूद रहे।