केराकत। पैगंबर साहब के बताए हुए रास्ते पर चलकर नेक अमल करने वाले की आकबत व दुनियां दोनों संवर जाती है। शुक्रवार की रात मदरसा मोहम्मदिया मुफ्तीगंज में आयोजित ईद मिलादुन्नबी के जलसे में दुमका (झारखंड) से तशरीफ लाए मौलाना जसीरुद्दीन ने नूरानी तकरीर में उक्त बातें कहीं। मुफ्ती मुफीद आलम कादरी खाजापुरी ने कहा कि सच्चा मुसलवान वह जो हदीस व कुरान शरीफ में बताए रास्ते पर अपनी जिंदगी गुजारे। मौलाना मो. मुकीम ने कहा कि जो भी शख्स पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) का यौमे पैदाइश का जश्न मनाता है तो सत्तर हजार फरिश्ते भी उस जश्न में शामिल होकर वे भी खुशियां मनाते हैं। मौलाना कारी जकीउल्लाह गाजीपुर ने कहा कि जो इन्सान माता पिता की खिदमत नहीं करता है। और वालिदैन (माता-पिता) का दिल दुखाता है तो उससे अल्लाह व रसूल रूठ जाते हैं। ऐसे इन्सान की दुनियां और आकबत दोनों बिगड़ जाती है।
जलसे में मदरसे में अपनी दीनी तालीम हाफिजा से फारिग हो चुके तोल्बा (छात्र) हाफिज गुलफाम, मो. वारिस रजा, मो. सुहेल बनारसी एवं कारी मो. वसीम को मुफ्ती मुफीद अहमद कादरी ने सिर पर साफा बांधकर व सनद देकर सम्मानित किया। जलसे में शायर कोयल लखनवी व शायर असीर बनारसी ने अपनी बेहतरीन नातिया कलाम सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। मौलाना अवैश रजा मीरजापुरी ने भी हदीस व कुरान की रोशनी में नूरानी तकरीर कर लोगों से बुरे कामों से बचने की सलाह दी। चार बजे भोर तक चले जलसे की सदारत मौलाना ईसुल खैरी व संचालन अमजद रजा बनारसी ने किया। जलसे से पूर्व ईद मिलादुन्नबी का एक जुलूस अपनी शान शौकत से मुफ्तीगंज पुलिस चौकी से निकल कर बाजार भ्रमण करते हुए मदरसा मोहम्मदिया पर पहुंच कर जलसे में तब्दील हो गया। जुलूस में शामिल अंजुमनो को उद्योग ब्यापर मंडल के प्रान्तीय मंत्री व जिलाध्यक्ष इन्द्र भान सिंह इन्दु, कोतवाल अनिल सिंह व चौकी प्रभारी कमलेश कन्नौजिया ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।