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सत्य की खोज करना ही श्रीमद भागवत: विवेकानंद

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सतहरिया। फिरोजाबाद के संत स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सत्य की खोज करना ही श्रीमद्भागवत है। श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते कहा कि सत्य की खोज ही भागवत कथा का मूल मंत्र है। सत्य ही हरिनाम है। सत्य चित्त व आनंद परमात्मा का स्वरुप है। इसी को जीवन में उतारना ही परमात्मा व जीव का मिलन है। वह मुंगराबादशाहपुर के मां काली मंदिर परिसर में भागसवत कथा के पहले दिन भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे।
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उन्होंने ने जीवन जीने की कला के बारे में बहुत ही सरल उपाय बताया। कहा कि सुबह सोकर उठने के पश्चात सबसे पहले मां पृथ्वी, गुरुओं, माता पिता को प्रणाम करना ही जीवन का भजन है। जो प्राणी इस मंत्र को नित्य प्रतिदिन जीवन में उतारने का प्रयास करता है तो उसका जीवन मंगलकारी हो जाता है। जो व्यक्ति हरिनाम संकीर्तन व जाप करता है वह मरने के बाद भी सत्य योनि का भागीदार हो जाता है। समाज में यश, कीर्ति, वैभव तथा धन वगैरह जो मिलता है वह सब माता पिता व गुरुओं के आशीर्वाद से मिलता है। उसका व्यक्ति को अनुभव करना चाहिए। धन के सदुपयोग का रास्ता बतलाया। कहा कि लक्ष्मी वहीं रहती है जो परमात्मा को दान करता है। यही धन की सद्गति है। सच्ची विद्या वह है जो परमात्मा को मिला दे। उसका उपयोग ब्रह्म चिंतन में करना चाहिए। हनुमान में अपार ताकत थी जिसे उन्हें एहसास कराना पड़ता था। उसी प्रकार व्यक्ति को अपने अंदर निहित शक्ति व पुरुषार्थ को जगाना होगा। जीवन के सारे तापों को कृष्ण चरणामृत से ही दूर किया जा सकता है। कहा कि राधा शक्ति तथा कृष्ण ब्रह्म है। जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण तथा उसे पढ़ना चाहिए। सिर्फ परमपिता परमेश्वर ही पूर्ण है, बाकी सब अधूरे हैं। मुख्य यजमान भगौती प्रसाद कसौधन अपनी धर्म पत्नी कृष्णा देवी के संग भागवत पुराण का श्रवण कर रहे हैं। इस मौके पर अंकित कुमार, कन्हैया लाल, संजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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