जौनपुर। जिले को शौच मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने घर- घर शौचालय तो बनवा दिए लेकिन असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। ईंट भट्ठों और ढाबों पर काम करने वाले श्रमिक अब खुले में शौच मुक्त अभियान के लिए चुनौती बन गए हैं। जिले में 507 ईंट भट्ठे और 57 ढाबे हैं, जिन पर अनुमान के मुताबिक तकरीबन पचास हजार मजदूर काम करते हैं।
ईंट भट्ठों व ढाबों पर शौचालय बनवाए बिना खुले में शौच मुक्त नहीं किया जा सकता। लिहाजा जिला प्रशासन ने सभी ईंट भट्ठों और ढाबों की जांच शुरू कर दी है। जिन ईंट भट्ठों पर शौचालय की सुविधा नहीं होगी। ऐसे ईंट भट्ठों के मालिकों को नोटिस देकर शौचालय बनवाने को कहा जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिया है।
ईंट भट्ठों व ढाबों की जांच करने के लिए अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। जिसमें जिला अभिहित अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी व खंड विकास अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित ईंट भट्ठों व ढ़ाबों की जांच करने का कार्य किया जाएगा।
शौचालय विहीन ईंट भट्ठों व ढ़ाबों की जांच करने का कार्य शीघ्र शुरु किया जाएगा। जिन ईंट भट्ठों व ढ़ाबों पर शौचालय नहीं होगी। उसके मालिकों को नोटिस देकर शौचालय बनवाने का कार्य कराया जाएगा। जांच करने के लिए अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है।
गौरव वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी