सतहरिया। महाराष्ट्र के संत आचार्य मनोज पांडेय ने कहा कि परमात्मा की भक्ति करने से मनुष्य सांसारिक मोह माया से मुक्त हो जाता है। प्रभु के नाम का जप करने से प्राणियों की सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं। आज प्राणियों को चिंता रूपी दानव खाए जा रहा है। संसारिक मोह माया की बेड़ी में बंधकर परमात्मा की वंदना के लिए व्यक्ति के पास समय नहीं बच रहा है। चिंता और चिता के रहस्य को समझाते हुए कहा कि चिता मनुष्य को मरने के बाद जलाई जाती है लेकिन चिंता मनुष्य को जीते जी ही जला देती है। प्रभु संकीर्तन भजन ही चिंताहरण की महा औषधि है। संत ने कहा कि विदुर ने धृतराष्ट्र को पुत्र मोह से दूर रहने तथा धर्म नीति के अनुसार शासन चलाने का सुझाव दिया था। यह बात जब दुर्योधन तक पहुंची तो उसने विदुर को हस्तिनापुर राज दरबार से अपमानित करके बाहर निकाल दिया। धर्म व पुण्य के महत्व को बताते हुए कहा कि भगवान राम ज्ञान व मां सीता भक्ति के प्रतीक है। यह वहीं रहते है जहां पर पुण्य आत्मा होती है। पुण्य आत्मा के रूप में विदुर का दरबार से बाहर निकलना ही कौरवों के पतन का कारण बन गया। उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के यहां छप्पन प्रकार के व्यंजन का निमंत्रण छोड़ दिया। विदुर के घर पहुंच कर केले के छिलके व साग का भोग लगाया। संचालन ओमप्रकाश टैगोर ने किया। राज मिश्रा आर्गन, पप्पू सिंह ढोलक, रोहित पैड पर संगत कर रहे है। मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी सहित तिवारी परिवार कथा का श्रवण कर रहे है। इस मौके पर नन्हकू महराज, चंद्रेश पाण्डेय, सुमित आदि मौजूद रहे।