जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 22 वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने छात्रों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की तेजी से बढ़ रही भागीदारी की सराहना की वहीं दूसरी तरफ छात्रों को आगे बढ़ने के लिए चेताया भी। उन्होंने कहा कि लड़कियां आगे बढ़ रही हैं लड़कों को सोचना होगा। राज्यपाल प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में लड़कों और लड़कियों के प्रतिशत का तुलनात्मक आंकड़ा भी प्रस्तुत किया। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में छात्राओं की भागीदारी 85 फीसदी होने पर शाबाशी दी। वहीं पूर्वांचल विश्वविद्यालय की लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में और ऊंची उड़ान भरने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा सफलता के लिए अपने भीतर प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना होगा।
राज्यपाल शिक्षा में छात्र और छात्राओं की भागीदारी का विवरण देते हुए कहा कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में फिर छात्राओं ने बाजी मारी है। कुल 58 छात्रों का चयन गोल्ड मेडल के लिए किया गया, जिसमें समें 24 छात्र और 34 छात्राएं हैं। वर्ष 2017 की मुख्य परीक्षा में कुल 158276 छात्रों को डिग्री दी गई है। जिसमें 60471 छात्र और 97805 छात्राएं शामिल हैं। छात्रों की भागीदारी 41 फीसदी जबकि छात्राएं 62 फीसदी हैं।
राज्यपाल रामनाईक ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अलावा छत्रपति साहू जी विश्वविद्यालय कानपुर और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्राओं की संख्या 81 फीसदी, गोरखपुर विश्वविद्यालय में 82 फीसदी और डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में 85 फीसदी छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। प्रदेश के 24 विश्वविद्यालयों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो कुल 12 लाख 58 हजार छात्रों को डिग्री दी गई है। जिसमें 56 फीसदी छात्राएं हैं और 44 फीसदी छात्र शामिल हैं। जबकि पिछले वर्ष की परीक्षा में छात्राओं का प्रतिशत 51 था। एक वर्ष में छात्राओं की संख्या पांच फीसदी बढ गई है। जो महिला सशक्तिकरण के लिए सुखद संदेश हैं।
भाषण हिंदी में करने को कहा
जौनपुर। राज्यपाल राम नाईक ने समारोह के मुख्य अतिथि ‘शांति स्वरूप भटनागर’ पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक प्रो. विक्रम कुमार भाषण का हिंदी में अनुवाद करने को कहा। कहा कि हमारे छात्र मेधावी हैं। वह अंग्रेजी को बखूबी समझ सकते हैं लेकिन उनके अभिभावक अंग्रेजी नहीं समझ सकते। दीक्षांत में छात्रों को क्या दीक्षा दी गई, अभिभावकों को पता नहीं है। हिंदी हमारी मातृभाषा है। खुलकर हम सभी को इसका हर जगह उपयोग करना चाहिए।