खुटहन। मध्य प्रदेश की कथा वाचक साध्वी लक्ष्मी मणि देवी ने कहा है कि सत्संग हमें मुक्ति के मार्ग पर ले जाने की प्रेरणा देता है। संसार का कोई भी धर्म हो, सभी हमे सत्कर्म की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। गोस्वामी द्वारा रचित राम चरित मानस में सभी आश्रमों के कर्तव्यों का सार छुपा हुआ है। इसके श्रवण, मनन, वाचन और आचरण में समाहित कर लेने मात्र से मानव भव को पार हो जाता है। वह सियरावासी गांव में आयोजित मानस कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थी।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़े भाग्य से मिला है। इसे ब्यर्थ में न गवांए। गृहस्थ आश्रम का पालन करते हुए उस परम पिता का स्मरण भी करते रहिए। उन्होंने कहा कि कलयुग में सबसे बड़ा पून्य है, सत्कर्म। जो सत्संग से प्राप्त होता है। इसे अपने जीवन चरित्र में धारण कर मानव ईश्वर को आसानी से प्राप्त कर सकता है। झूठ मत बोलो, बेमानी से बचों, ईर्ष्या द्वेष और अहंकार को पास मत आने दो। आपका स्वत: ही कल्याण हो जाएगा। इस मौके पर अमरनाथ तिवारी, डा. बिजय शंकर तिवारी, रामकृपाल, ओमप्रकाश, सनी तिवारी, कुंवर साहब, रायसाहब आदि मौजूद रहे। आयोजक डा. बाबूराम त्रिपाठी ने आभार जताया।