जौनपुर। स्वामी नारायणा नंद तीर्थ ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समस्त मानव के कल्याण के लिए है। परमात्मा भौगोलिक सीमाओं से बहुत बड़ा है। व्यक्ति और राष्ट्र में परमात्मा को बांटा नहीं जा सकता। वह सनातन है और सनातन धर्म साम्प्रदायिक नहीं है। बरसठी के असवां गांव सिद्धनाथ बाबा सिद्धार्थश्रम में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ के छठवें दिन प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसी के आग्रह में आकर धर्म का परित्याग नहीं करना चाहिए। सनातन धर्म की परंपरा सम्पूर्ण विश्व की कल्याण के लिए है। उपदेशों को क्रियान्वित नहीं किया जाता तो वह मन बहलाव का साधन भर रह जाता है। सत्संग का जीवन में बहुत महत्व है क्योंकि अपनी आत्मा के प्रतिकूल किसी से व्यवहार नहीं करना हमें सत्संग से ही ज्ञात होता है। अशोक शुक्ल, अखिलेश तिवारी अकेला, विजय शंकर पाण्डेय, सोनू सिंह, दया शंकर सिंह, नंदलाल सिंह, अर्जुन तिवारी, पंकज मिश्र आदि ने सत्संग लाभ प्राप्त किया।
जहां मर्यादाओं के पालन हो, वहीं स्वर्ग
खुटहन। भरत जैसा भाई, कौशिल्या जैसी माता और सीता जैसी पत्नी जहां हो, वहां स्वर्ग होता है। परिवार के लोग चरित्रवान और मर्यादाओं के पालक हो तो पृथ्वी पर स्वर्ग है। यह बात प्रयागराज से पधारे परमेश्वर दास त्यागी महराज ने गुरुवार की रात बड़नपुर गांव में मानव उत्थान सेवा समिति के सौजन्य से आयोजित रामकथा में कही।
भरत को त्याग की मूर्ति बताते हुए कहा कि भरत को अयोध्या का राजा बनने से जितनी खुशी मिलती उसका हजारों का गुना दुख उन्हें भाई के वियोग से हुआ। भरत ने अयोध्या में रहकर वनवासी जीवन जीया। मानव स्वार्थी हो गया है। वह काम, क्रोध, मद, मोह और लोभ के चक्कर में पड़ कर अपनी मर्यादाओं पर खुद ही कुठाराघात कर रहा है। सुरेंद्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, विनोद प्रजापति, सुर्मिला देवी, राधा सोनी, गीता, राम अचल, अजय सिंह, बंटी, सुभाष उपाध्याय आदि मौजूद रहे।