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हाशिमपुरा नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने में अकबर आब्दी की भूमिका अहम

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जौनपुर। हाशिमपुरा नरसंहार मामले के दोषी पीएसी के 16 पूर्व जवानों को दिल्ली के हाईकोर्ट से उम्रकैद की सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता अकबर आबदी जौनपुर जिले के जफराबाद के नासही मोहल्ले के मूल निवासी हैं। बुधवार को दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद अधिवक्ता अकबर आबदी ने गुरुवार को इस केस से जुड़े अपने अनुभवों को अमर उजाला के साथ साझा किया। अपने पैतृक गांव आए अधिवक्ता अकबर आबदी वर्ष 2008 से इस केस को देख रहे थे। वह कहते हैं कि 21 मार्च 2015 को तीस हजारी कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए जब आरोपियों को बरी कर दिया था तो वह मायूस नहीं थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोषियों की पहचान की कमी रह गई थी। इसकी वजह यह कि पुलिस की तरफ से लापरवाही बरती गई थी। अधिवक्ता अकबर आबदी का शहर के पानदरीबा मोहल्ले में ननिहाल है। वह 2008 से इस मुकदमे में बतौर स्पेशल एडिशनल पब्लिक प्रॉस्क्यूटर के तौर पर हाशिमपुरा कांड में अपनी जान गवां चुके 42 परिवारों को इंसाफ दिलाने की जंग लड़ रहे थे। अकबर आब्दी की पत्नी न्यायिक अधिकारी है और एडीजे पद पर तैनात है। 22 मई 1987 को अलविदा जुमा के बाद हाशिमपुरा की मस्जिद से तलाशी और जांच के नाम पर 104 लोगों को उठाया गया था। जिसमें से 42 लोगों की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाइकोर्ट ने सभी को हत्या, अपहरण,साक्ष्यों को मिटाने का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
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