बरईपार। क्षेत्र के मोहरियाव में पांच दिवसीय आदर्श रामलीला धर्म मंडल समिति की ओर से आयोजित रामलीला के अंतिम दिन सोमवार रात लक्ष्मण शक्ति एवं रावण वध का मंचन किया गया। लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने पर राम दल में खलबली मच जाती है। सभी लोग गम में ड़ूब जाते हैं। प्रभु श्री राम हनुमान को सुखेन वैद्य द्वारा बताए गए द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं। राम का विलाप देख दर्शकों की आंखों से आंसू छलक जाते हैं। हनुमान संजीवन बूटी लेकर लौटते हैं। सुखेन वैद्य के उपचार के बाद लक्ष्मण को होश आता है। फिर से राम अपनी सेना के साथ लंका पर चढ़ाई कर देते हैं। सभी राक्षसों का संहार करते हैं। रावण की मृत्यु हो जाती है। जिससे लंका पर विजय प्राप्त किया। रामलीला का उद्घाटन प्रणवम स्कूल ऑफ चिल्ड्रेन सुजानगंज के प्रबंधक डा. प्रमोद सिंह एवं थानाध्यक्ष सुजानगंज विनोद कुमार यादव ने किया । सिंह ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों पर चलकर उनका अनुशरण करें। थानाध्यक्ष ने कहा कि राम का चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर जनार्दन दुबे, सोनू तिवारी,रामजी पांडेय, चाँद मोहम्मद, शोहेल खान, बड़े चौबे, पप्पू पाण्डेय आदि रहे। संचालन भास्कर मणि तिवारी ने किया।
राम का विलाप देखकर छलके आंसू
नेवढ़िया। आदर्श रामलीला समिति विराजीपुर (धनेथू) के मंच पर पांचवें दिन लक्ष्मण शक्ति, विभीषण शरणागत, अंगद रावण संवाद का मंचन हुआ।
युद्ध में मेघनाद द्वारा लक्ष्मण के ऊपर ब्रम्हास्त्र का प्रयोग करने से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। सूचना मिलते ही राम दल में मायूसी सी छा गई। भाई लक्ष्मण को मूर्छित देखकर प्रभू श्रीराम गम में डूब जाते हैं। वह फूट फूटकर रोने लगे। प्रभू श्रीराम के विलाप दृश्य देख श्रद्धालुओं की आंखें भीग गई। तभी संकटमोचन हनुमान ने द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी ले कर आ जाते हैं। सुखेन वैद्य द्धारा भाई लक्ष्मण को संजीवनी बूटी देते ही लक्षमण होश में आ गए। राम के किरदार में सत्यम दुबे,लक्ष्मण के किरदार में गौरव दुबे, सीता की आदर्श दुबे, हनुमान की राजन दुबे, अंगद की संजय दुबे, रावण की महेंद्र मौर्या, विभीषण की शिवम दुबे ने निभाई।
राम की सेना पर भारी पड़े लव व कुश
थानागद्दी। श्रीराम नाटक रामलीला समिति की ओर से थानागद्दी बाजार में श्रीराम का राजतिलक व लव- कुश की वीरता का मंचन किया गया। जबकि जय बजरंग रामलीला समिति द्वारा परसादीपुर में सीता की खोज और लंका दहन का मंचन किया गया। रावण बध करके विभीषण को राजगद्दी सौपने के बाद जब प्रभु राम अयोध्या पहुंचते हैं। इसके बाद दीपावली जैसे माहौल में जय श्रीराम के जयकारे से पांडाल गूंज उठा। श्रीराम का राजतिलक होने के बाद अयोध्या में राम राज्य की परिकल्पना साकार हो गई। इसी बीच प्रजा के ताने पर प्रभु श्रीराम ने माता सीता का परित्याग किया और उन्हें अग्निपरीक्षा से गुजरने की आज्ञा दी। महर्षि बाल्मीकि के संरक्षण में माता सीता के जन्मे पुत्र लव व कुश शस्त्र विद्या का प्रशिक्षण ले रहे थे। उधर अयोध्या में अश्वमेध यज्ञ आयोजित किया गया। यज्ञ का घोड़ा लव व कुश पकड़ लेते है। परिणाम स्वरूप राम की सेना से युद्ध में दोनों बालक भारी पड़ते है। अंत मे स्वयं श्रीराम को युद्ध में उतरना पड़।आमना -सामना होने पर माता सीता पहुंचकर लव व कुश को श्रीराम का परिचय देती है। इसके बाद पृथ्वी माता के फटने पर मां सीता शमा जाती हैं। यह दृश्य देख दर्शक भावुक हो गए। उधर परसादीपुर में सीता की खोज और लंका दहन की प्रस्तुति सराही गई। हनुमान को साधारण बंदर समझने की भूल रावण को भारी पड़ी, जब उनकी पूंछ में कपड़ा लपेटकर मारने की योजना बनाई गई। पराक्रमी हनुमान की पूंछ में जब असुरों ने आग लगाई तो वे छलांग लगाने लगे। जिससे देखते ही देखते सोने की लंका जलकर खाक हो गई। प्रबंधक शिवप्रताप सिंह ने कुशल मंचन के लिए पात्रो और दर्शको के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर पंकज बाबा,कैलाश शुक्ल, अशोक शुक्ल, दुर्गा प्रसाद सिंह,सत्येंद्र सिंह,शिव कुमार सिंह,रामचंद्र यादव, लकी सिंह और दीपचंद शुक्ल आदि रहे।