थानागद्दी। शिव धनुष के टूटने की जानकारी मिलते ही क्रोध में डूबे परशुराम मिथिला नरेश द्वारा आयोजित सीता स्वयंबर में पहुँचकर शिव धनुष का भंजन करने वाले का नाम पूछ्ते है। क्रोध में कहे शब्दो को सुनकर सन्नाटा पसर गया। किन्तु लक्ष्मण की कुटिल मुस्कान पर परशुराम गुस्से से तमतमा उठते है। थानागद्दी में चौथे दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंबर की लीला देख दर्शक भाव विभोर हो गए। सीता स्वयंबर में देश विदेश के अनेक राजाओ सहित असुरों के राजा रावण और बाणासुर धनुष तोड़कर सीता से विवाह को आतुर दिखे। सबने बारी बारी से धनुष उठाना चाहा पर उसे हिला तक नहीं सके। राजा जनक की पीड़ा सुन विश्वामित्र के संकेत पर श्रीराम ने शिव धनुष को जैसे ही उठाया धनुष खण्ड खण्ड हो गया। वैसे ही जय श्रीराम के उदघोष से पंडाल गूंज उठा। सीता ने राम के गले में बरमाला डाल दिया। मंगल गीत सुन सभी भाव विभोर हो गए। उधर धनुष टूटने की खबर सुन जब परशुराम पहुँचते है तो जनक उनके गुस्से को भापकर आयोजन का कारण बताते है पर उनका क्रोध थमने का नाम नहीं ले रहा था। इसी क्रम में परशुराम लक्ष्मण संवाद में बात बिगड़ती देख भगवान राम विनयावनत कहते है कि हे नाथ शिव धनुष तोड़ने वाला आपका दास ही है। पात्रों में मोहम्मद एकराम, मोहम्मद असलम, मज्जन, अरविंद शुक्ल,राजकुमार गोंड़ और रमाकांत पाठक का अभिनय सराहा गया। संचालन संजय मिश्रा ने किया। जय बजरंग रामलीला समिति के बैनर तले परसदीपुर में रामजन्म और नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। निर्देशन अशोक शुक्ल और शिवप्रताप सिंह ने आभार जताया। इस मौके पर ओमप्रकाश शुक्ल, पंकज बाबा, दुर्गा प्रसाद सिंह, सत्येंद्र सिंह, शिवकुमार सिंह, रामचन्द्र यादव, दीपचंद शुक्ल, योगेश शुक्ल उपस्थित रहे।