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पुत्र वही जो माता-पिता के मान सम्मान को बढ़ाए

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बक्शा। कथा वाचक बाल गोविंद शास्त्री ने कहा कि पुत्र वही जो माता-पिता के मान को बढ़ाए। माता-पिता की सेवा से बड़ा मानव का कोई धर्म नहीं है। वह कपूरपुर गांव निवासी आजाद सिंह के आवास पर चल रहे पांच दिवसीय राम कथा के पांचवें और समापन अवसर पर भक्तों की बीच प्रवचन कर रहे थे।
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पंडित शास्त्री ने कहा कि पुत्र का कर्तव्य है कि वह अपने माता पिता की सेवा कर उन्हें सुख की अनुभूति कराए। वह पुत्र धन्य हैं जो अपनी वाणी से क्रिया-कलाप से माता-पिता को सुखी करता है। भगवान राम माता कैकेई से कहते हैं कि माता बता दो मेरे पिता जी दुखी क्यों हैं, मैं अपने पिता के सुख के लिए विष भी पी सकता हूं। अग्नि में समाहित तो समुद्र में कूद सकता हूं, रत्नों से भरी हुई अयोध्या का भी त्याग कर सकता हूं। इस दौरान मिर्जापुर से पधारे कथा वाचक धर्मराज शास्त्री व झांसी से पधारी रूपम द्विवेदी ने भजन प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। संचालन श्याम नारायन जायसवाल ने किया। इस दौरान व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष इंदू सिंह, राजीव सिंह, विजय प्रताप सिंह, अरविंद सिंह, देव नारायण उपाध्याय, विनय कुमार सिंह, शिव साहब सिंह आदि मौजूद रहे।
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