जौनपुर। महर्षि बाल्मीकी की जयंती बुधवार को जगह-जगह श्रद्धा के मनाई गई। उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। उनके द्वारा रचित महाकाव्य रामायण हर किसी को जीवन सभी क्षेत्र में मार्ग दर्शन करता है। शिक्षकों ने जीवन को विस्तार से रेखांकित किया।
टीडी कालेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य डा. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि महर्षि बाल्मिीकि सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके जीवन से सीख लेकर हर कोई जीवन में सफलता हासिल कर सकता है। बाल्मीकि रामायण आधुनिक समाज के लिए महत्वपूर्ण है। डा. सरोज सिंह, डा. राजीव रतन सिंह, डा. आरएन ओझा, डा. हरिओम त्रिपाठी, डा. ओपी सिंह, डा. देवव्रत मिश्र, डा. शैलेंद्र सिंह वत्स ने विचार व्यक्त किया।
सिकरारा: गोविन्द बल्लभ पन्त पीजी कालेज प्रतापगंज में बुधवार को महर्षि बाल्मीकि की जयन्ती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर प्राचार्य डा. प्रमोद कुमार और प्राध्यापकों ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उनके द्वारा रचित महाकाव्य रामायण में श्रीराम के जीवन चरित्र के माध्यम से मर्यादा, सत्य, प्रेम, कर्तव्य, भ्रातृत्व, मित्रत्व एवं सेवक धर्म की शिक्षा को रेखांकित किया। छात्रों ने नाटक के माध्यम से उनके प्रारम्भिक जीवन के डाकू जीवन से लेकर बाल्मीकि बनने तक के कथा वृत्त को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस तरह मरा-मरा कह कर वह परम सत्ता को प्राप्त करते हुए और संस्कृत भाषा में रामायण की रचना कर आदि कवि बने। कार्यक्रम में डा. विजय कुमार उपाध्याय, डा. आनन्द सिंह, डा. अरुण कुमार उपाध्याय, अनन्त प्रकाश दूबे, डा. राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय, विनय कुमार तिवारी, शकील अहमद, डा. समीर दूबे आदि मौजूद रहे।
बदलापुर / घनश्यामपुर । सल्तनत बहादुर पीजी कालेज के राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा बुधवार को विद्यालय परिसर में महर्षि वाल्मीकि की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण कर उनको नमन किया गया। साथ ही उनके बारे में प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शैली चौधरी ने स्वागत गीत और रक्षा तिवारी ने सरस्वती वंदना को प्रस्तुत कर किया।
मुख्य अतिथि डा. धीरेंद्र पटेल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि को श्रीराम के जीवन की हर घटना का ज्ञान था। इसी आधार पर उन्होंने रामायण ग्रंथ की रचना की। इसमें कुल 24 हजार श्लोक और सात अध्याय हैं, जो कांड के नाम से जाने जाते हैं। इस ग्रंथ से त्रेता युग की सभ्यता, रहन सहन, संस्कृति की पूरी जानकारी मिलती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. अमित साहू व संचालन डा. राम मोहन अस्थाना ने किया। इस अवसर पर डा. रितेश, डा. अखिलेश, डा. पवन कुमार सिंह, डा. आलोक कुमार सिंह, बेचन सिंह, बृजमोहन गुप्त, शुभम गौतम, शिल्पा शुक्ला, गुड़िया यादव, आशुतोष वर्मा आदि उपस्थित रहे।