नेवढ़िया। कथा वाचक अंशुमान महाराज ने कहा कि भगवान तो भक्तों के भाव के भूखे होते हैं। भगवान ही अपने भक्तों को भव से पार उतारते हैं। भगवान और भक्तों के बीच बहुत ही नजदीक का संबंध होता है। राम कथा सुनकर निर्गुण से सगुण रूप भगवान अपने भक्त के लिए आते हैं। वह क्षेत्र के नेवढ़िया बाजार स्थित एसएच कान्वेंट स्कूल प्रांगण में चल रहे सात दिवसीय राम कथा में भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे।
भक्त व भगवान के संबंध को दर्शाते हुए उन्होंने कहा कि एक भक्त निर्बल व नेत्रहीन था। भक्त एक दिन एक गांव में अतिथि के रूप में गया था। वहां पर भक्त भगवान का पद गा रहा था। गाते गाते काफी रात हो गई। गांव के सभी लोग पद सुनते सुनते सो गए। कोई हुंकारी नहीं भर रहा था तो नेत्रहीन भक्त को लगा कि सब सो गए हैं। बिना कुछ बोले नेत्रहीन भक्त वहां से अपने घर के लिए चल दिया। मार्ग में एक कुआं था। नेत्रहीन भक्त एक छड़ी के सहारे चलता था। भक्त ने जैसे ही कदम कुएं की तरफ बढ़ाया तभी भक्त को कष्ट में देख भगवान से रहा नहीं गया। बालक रूप में स्वयं भगवान वहां प्रगट हो गए। बालक रूप में छड़ी पकड़ कर नेत्रहीन भक्त को भगवान लेकर आए। तब भक्त ने पूछा तुम कौन हो बेटा। भगवान बोले बाबा मैं आपका पद सुनते सुनते आ रहा था। भक्त को लगा यह संसारी बच्चा नहीं हो सकता। क्योंकि संसारी बच्चा इतना मीठा नहीं बोल सकता है। भक्त ने पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है। भगवान ने कहा आप जिस नाम से बुलाना चाहते हैं आप बुला सकते है। भक्त को आभास हो गया कि यह कोई बालक नहीं भगवान ही हैं। भक्त ने जैसे ही भगवान का हाथ पकड़ना चाहा वैसे ही भगवान अदृश्य हो गए। तब भक्त रो पड़ा और कहा हे भगवान मुझे निर्बल और नेत्र हीन जानकर आप मेरा फायदा उठा रहे हैं, लेकिन एक बात याद रखिएगा प्रभु आप हमारे हृदय से निकल कर नहीं जा सकते। भगवान अपने भक्तों के लिए कभी भी आ सकते हैं। कथा में ओंकारनाथ तिवारी, राजेश दुबे, भोला उपाध्याय, चिंतामणि मिश्र, सुभाष तिवारी आदि मौजूद रहे।