सिकरारा। क्षेत्र के अवधूत कुटी पर गुरुवार को शारदीय नवरात्र महोत्सव का समापन कुमारी पूजन से हुआ। व्रत रहने वाली महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने उनके जूठन से व्रत का पारण किया। कुटी के सेवक दीप राज ने बताया कि अघोर गुरु प्रिय दर्शी राम के सूक्ष्म निर्देशन में कुटी पर प्रतिपदा से ही नवरात्र के विविध आध्यात्मिक कार्यक्रम चल रहे थे। अघोर पंथ में मूर्ति स्थापित कर विसर्जित करना वर्जित है। इसी लिए देवी के 9 स्वरूपों के रूप में 9 साल से कम उम्र की नौ कन्याओं तथा भैरव के रूप में एक बालक की विधिवत पूजा करके उन्हें स्वादिष्ट व्यंजन खिलाना तथा उनके जूठन से व्रत पारण किया गया। यथाशक्ति द्रव्य देकर उनकी विदाई की गई। इसके पीछे कही न कहीं नारी सशक्तिकरण की अवधारणा भी छिपी है। इससे पहले श्रद्धालुओं द्वारा हवन भी किया गया। दुर्गा सप्तशती तथा दुर्गा चालीसा का पाठ किया गया। हवन के पश्चात लोगों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान दुष्यंत सिंह, अवधेश सिंह, लालती देवी, डा. विजय प्रकाश बाबा, मालती सिंह, पिन्टू यादव, मिथिलेश, विजय प्रताप आदि मौजूद रहे।
बदलापुर: नवदुर्गा की विदाई पर श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराकर दान दिया। नौ दिन का उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं ने हवन पूजन कर नव दुर्गा रूपी कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें यथा शक्ति दान दक्षिणा दिया। बरईपार: मां दुर्गा के रूप में कन्याओं का पूजन किया गया। मां के नौ रूपों के अनुसार लोगों ने नौ -नौ कन्याओं का पूजन किया। कर्म कांड के जानकार पंडित कामता प्रसाद पांडेय ने बताया कि आयु के अनुसार कन्या रूप का पूजन होता है।