मुफ्तीगंज। सैकड़ों साल पुराना चंडी मां का मंदिर जिसकी लोगों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना है। मन्दिर के महंत महेश्वर दास ने बताया कि बाबा राम चरन दास सबसे पहले इस मंदिर के महंत रहे। केराकत कोतवाली अंतर्गत बीरमपुर गांव के ही निवासी रहे लेकिन वह घर न रहकर अयोध्या में रहने लगे और वही से पुन: आकर यहां मां चंडी का भव्य मंदिर बनवाए। उसके पहले से भी माता की पूजा होती रही। 10 बीघे में फैला यह चंडी माता का मंदिर जहां जौनपुर, वाराणसी, कलकत्ता ,हैदराबाद के भक्त जन माता का दर्शन करने आते हैं। नवरात्र में नौ दिन तक रात दिन भंडारा चलता है। जिसमें शक्ति पीठ की सजावट के साथ माता का पूजा हरिकीर्तन होता है। जिसमें 24 गांव के लोगों की भागीदारी होती है। महंत नागा महेश्वर दास लगभग सात साल से स्वतंत्र रूप से माता की सेवा में लगे हैं। इनके साथ रहने वालों में राम शिरोमणि दास, समी, विनय दस व नखड़ू महाराज रहते है। यहां दूर दूर से भक्त आते है। माता के मंदिर में पुजारी नागा महेश्वरदास ने गरीब, लाचार, असहाय, पीड़ित लोगों हेतु राम रोटी की योजना शुरू की है। वीरमपुर गांव प्रधान पति अरुण सिंह ने बताया कि माता के मंदिर में इस क्षेत्र के लोगों एवं बाहर के अन्य जिलों के श्रद्धालुओं की आस्था है। चंडी माता का यह मंदिर पूर्वजो के जमाने का है।