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अच्छे कर्मों के कारण मिलता है मानव शरीर: आलोक महाराज

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नेवढ़िया। कथा वाचक आलोक महाराज ने कहा कि भक्तों को बताया कि बड़े भाग्य से सभी को मनुष्य शरीर प्राप्त होता है। इसे व्यर्थ न गवाएं। उन्होंने बताया सामवेद में कहा गया है कि कई जन्मों के अच्छे कर्मों की वजह से मनुष्य का शरीर मिलता है। वैदिक परंपरा में माना जाता है कि मनुष्य का जन्म चौरासी लाख योनियों में आत्मा के भटकने के बाद मिलता है। मनुष्य के अलावा दूसरे सभी जन्मों में भोग ही प्रमुख रहता है। अच्छे कर्म केवल मनुष्य शरीर मिलने के बाद ही किए जा सकते हैं। वेदों में कहा गया है ‘मनुर्भव’ यानी मनुष्य बनें। इसका अर्थ है कि केवल मनुष्य शरीर पाने से हम मनुष्य नहीं हो जाते बल्कि इसके लिए अच्छा कर्म करने की जरूरत है। तुलसीदास ने एक स्थान पर लिखा है कि मनुष्य जन्म की बड़ाई देवता, ऋषि-मुनि और संतजनों ने की है। मनुष्य का जन्म पाकर भी जो लोग चेते उनका जन्म बेकार चला जाता है। चिंतन, मनन की शक्ति के कारण ही इंसान दूसरे जीवों से अलग है। चौरासी लाख योनियों (शरीरों) में भटकने के बाद मनुष्य जन्म मिलने पर भी हम इसकी हिफाजत नहीं करते। वेदों में कहा गया है ‘भोगापवर्गार्थं दृश्यम’ यानी दुनियां में जन्म लेने का मकसद भोग और अपवर्ग दोनों है। इस संतुलन के लिए धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष के सिद्धांत को सामने रखा गया। इस मौके पर विनोद तिवारी, रवि तिवारी, आशीष तिवारी, सुजीत तिवारी, भुल्लन तिवारी, राजेंद्र तिवारी, शुभम, ज्योति पाठक, अवनीश, मोहित आदि मौजूद रहे।
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