जौनपुर। समाज में ऐसे महिलाओं की कमी नहीं है जो निस्वार्थ भाव से काम कर रही हैं। बगैर स्त्री के सृजन नहीं हो सकता। यह हमारी प्राचीन सभ्यता है। हमारे ऋषि मुनियों ने तो स्त्री को पुरूष से भी श्रेष्ठ माना है। सनातन का जो स्त्री तत्व है, उसकी व्याख्या और मीमांसा बहुत सरल नहीं है। यह सृष्टि का ऊजा क्षेत्र है। जो जीवन और सृजन का निरूपण और निर्धारण करता है। नारी का मूल शब्द नर है। नारी वस्तुत: वही नारायणी है जिससे समस्त ब्रह्माण्ड संचालित हो रहा है। समाजसेवा के क्षेत्र में नारियों का योगदान अद्वितीय है।
मड़ियाहूं क्षेत्र की निवासी आभा सिंह ने वर्ष 2012 में क्लास वन की सरकारी नौकरी समाजसेवा के लिए छोड़ दी। महाराष्ट्र के धारावी में उन्होंने महिलाओं के लिए मुफ्त में केस लड़ने के लिए कानून सहायता केंद्र खोला है। मुंबई हाईकोर्ट में श्रमिक और गरीब महिलाओं के लिए वह नि:शुल्क केस लड़ती हैं। जौनपुर की एक हजार महिलाओं को उन्होंने आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई सीखाया है। 700 से अधिक युवतियों को कंम्प्यूटर की मुफ्त शिक्षा रणसमर संस्था द्वारा दिलाया है।
महिला समाख्या की जिला समन्वयक रजनी सिंह शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक कानून पंचायत घरेलू महिला उत्पीड़न पर काम कर रही हैं। उन्होंने जिले में 945 महिला संघ बनाया है। जिसमें 11 हजार पांच सौ महिलाएं हैं। 745 ग्राम पंचायतों में महिला एवं बाल अधिकार मंच का गठन किया गया है। जो बाल विवाह, बाल श्रम, यौन शोषण, मानव तस्करी के मुद्दे पर महिलाओं को जागरूक करने का काम कर रही हैं।
सिंगरामऊ राजघराने की डा. अंजू सिंह महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का कार्य कर रही हैं। विगत कई सालों से गरीब और लाचार महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें स्वावलंबी बनाती हैं। सैकड़ों युवतियों को प्रशिक्षण कराकर स्वरोजगार में उन्होंने सहयोग किया है। श्रमिक महिलाओं और विधवाओं को विभिन्न प्रकार की सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, गरीबों का नि:शुल्क इलाज, दवा जांच कराने में मदद करती हैं। क्षय रोगियों को संपूर्ण इलाज कराकर क्षय मुक्त करने के मिशन में वह कई वर्षों से लगी हैं।
डा. विमला सिंह नेत्रदान के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। किशोर न्याय बोर्ड, पल्स पोलियो, टास्क फोर्स, मानव अंग प्रत्यारोपण, जिला स्तरीय प्राधिकरण समिति से जुड़कर समाजसेवा के क्षेत्र में महिलाओं के लिए कार्य कर रही हैं।