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प्रभु को पाने के लिए किसी देश और परिवेश की जरूरत नहीं:शांतनु महराज

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जौनपुर। कथा व्यास शांतनु महाराज ने कहा कि संसार का सबसे सरल काम परमात्मा को पाना है। सबसे कठिन मनुष्य के लिए धन कमाना है। लेकिन आज के दौर में हमने सरल को कठिन और कठिन को सरल बना दिया। उन्होंने शुक्रवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में आयोजित श्रीराम कथा में तीसरे दिन भगवान राम के जन्मोत्सव का मनोरम वर्णन किया। इस मौके पर जन्मोत्सव मनाया गया। सोहर आदि गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे।
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उन्होंने कहा कि प्रभु को पाने के लिए किसी देश, वेश और परिवेश की जरूरत नहीं होती है। वह सरलता से अपने भक्त को मिल जाता है। परमात्मा मनुष्य के शुभ कामों को सदैव याद रखता है। मनुष्य की गलतियां उसे याद नहीं रहती। लेकिन मनुष्य मनुष्य की गलतियों को याद करता रहता है और अच्छे कामों को भूल जाता है। संगीतमय रामकथा में हारमोनियम पर अमन मिश्र, तबला पर भीमसेन, वायलिन पर सुरेश, बाँसुरी पर सुनील, सहगायक अंकित पाठक और सर्वेश तिवारी रहे। आचार्य पूजन सौरभ शास्त्री ने किया। व्यास पीठ का पूजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम यादव, प्रो. बीबी तिवारी, वित्त अधिकारी एमके सिंह , कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल, प्रो. वंदना राय, डा. दिनेश सिंह, डा. अजय दुबे, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. राज कुमार सोनी, डा. प्रदीप कुमार आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन डा. मनोज मिश्र ने किया। इस अवसर पर प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. राम नारायण, राकेश, डा.मनीष गुप्ता, डा. एसपी ओझा, डा. शैलेष प्रजापति, डा. सुनील कुमार, विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और क्षेत्र के तमाम लोग मौजूद रहे।
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