जौनपुर। यूं तो रामलीला का मंचन गांव गांव में होता है लेकिन बक्शा विकास खंड के सरायहरखू, मुंगराबादशाहपुर के गुड़हाई और शाहगंज की रामलाला की जिले में अलग पहचान हैं। सरायहरखू की रामलीला 1967 से हो रही है जबकि गुड़हाई की रामलीला 117 साल पुरानी है। यहां के कलाकार पूरे साल रोजी रोटी के सिलसिले में देश के चाहे जिस कोने में हों लेकिन रामलीला के प्रति उनकी आस्था इस कदर होती है कि समय पर वे गांव आ जाते हैं। कई कलाकार ऐसे हैं जो 35 से पचास साल से भी अधिक समय से रामलीला में अलग अलग किरदार निभाते हैं। सरायहरखू की रामलीला में कई अफसर हैं जो रामलीला में अलग अलग किरदार निभाते हैं। यहां रावण का पाठ करने वाले सुरेंद्रनाथ श्रीवास्तव 1967 से ही किरदार निभाते चले आ रहे हैं। वह अनु सचिव के पद से रिटायर्ड हुए हैं।
सरायहरखू की रामलाला की शुरुआत 1932में प्रेमनाथ राजाबाबू, जयंत्री प्रसाद और प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने शुरू की थी। खास बात यह कि सरायहरखू की रामलीला का मंचन और उसकी पूरी जिम्मेदारी कायस्थ बिरादरी के लोग ही संभालते है। आगामी 15 अक्टूबर से शुरू हो रही रामलीला के मंचन की तैयारी पूरी हो चुकी है। शुरू से आज तक 87 वें वार्षिक समारोह तक कायस्थ बिरादरी के लोग ही मंचन करते रहे। यह समिति रजत जयन्ती, स्वर्ण जयन्ती, हीरक जयन्ती भी मना चुकी है। यहां रामलीला का किरदार निभाने वाले कलाकारों में कई अफसर भी हैं। दिल्ली, बेंगलूरू, लखनई, कोलकाता और मुंबई जैसे मैट्रो शहरों में नौकरी करने वाले लोग रामलीला का मंचन करते हैं। रावण का किरदार निभाने वाले सुरेंद्रनाथ श्रीवास्तव अनुसचिव के पद से रिटायर्ड हुए हैं। 1988 से कुंभकरण का किरदार निभाने वाले जितेंद्र श्रीवास्तव प्रधानाध्यापक हैं। इस वर्ष समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव, मन्त्री विनोद कुमार श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष अनुराग श्रीवास्तव व निर्देशक कृष्ण कुमार श्रीवास्तव सहित कार्यकारिणी का चयन हो चुका है।
सतहरिया प्रतिनिधि के अनुसार मुंगराबादशाहपुर के मोहल्ला गुड़ाही की 117 वर्ष पुरानी रामलीला 5 अक्टूबर से शुरू होगी। पहले दिन नारद मोह रामलीला का मंचन होगा। रामलीला शुरुआत के पहले सूचना के तौर पर बीते बुधवार देर शाम को प्रभू भरत हनुमान मिलाप की भब्य झांकी निकाली गई।
नेवढिय़ा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के नेवढिय़ा बाजार में लगभग 45 वर्षो से रामलीला का मंचन होता है। रामलीला शुरू होन पर गांव के लोग जो दूसरे शहरों में रोजी रोटी के लिए रहते हैं वे भी परिवारछ समेत घर आ जाते हैं।
शाहगंज की लीला आज से होगी शुरू
शाहगंज। शाहगंज की मशहूर रामलीला शुक्रवार से शुरू होगी। लीला के लिए अयोध्या से प्रमुख स्वरूप पहुंच चुके हैं। समिति के कार्यकर्ता मंच आदि निर्माण में जुटे हैं।
शाहगंज की रामलीला समिति का एक सौ चालीस वर्ष पुराना इतिहास है। बताते हैं कि पंडित अनंत राम शास्त्री ने नगर में रामलीला की शुरुआत की थी। वहीं नगर के समाजसेवियों द्वारा समिति बनाकर नगर के पक्का पोखरा व मुख्य मार्ग पर भूमि दान देकर समिति को मजबूत करने का काम किया। नगर में दो चरणों में रामलीला होती है। दिन की लीला पक्का पोखरा स्थित मैदान में एवं रात की लीला का मंचन गांधीनगर कलेक्टरगंज व नई आबादी स्थित रामलीला मैदान में किया जाता है। रामलीला से लेकर भरत मिलाप तक समूचा नगर भक्तिरस में लीन रहता है। दशहरा में यहां पर 80 फुट ऊंचा विशालकाय रावण का पुतला दहन देखने के लिए अगल-बगल के जनपदों से लोग पहुंचते हैं। वहीं मेले में नगर की महिलाएं बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और ट्रक पर सवार होकर मेला देखने जाती हैं। वहीं भरत मिलाप भी खासा मायने रखता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का पुष्पक विमान रुपी भारी-भरकम रथ पूरी रात कहारों के कंधों पर रहता है। सड़क पर भारी जन सैलाब से रथ को आगे बढ़ाने के लिए अखाड़ा, काली नृत्य, पागल, खूनी की भूमिका में कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।