जौनपुर। जिले में डंगू ने पांव पसार लिया है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में पांच लोगों की इस बीमारी से मौत का दावा किया जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य महकमा इसे नकारने में लगा है। बुखार से पीडित 48639 लोगों की जनवरी से सितंबर तक जांच कराई गई थी। इनमें 416 लोगों की विशेष जांचें कराई गईं। कुल 51 लोगों के नमूने डेंगू की जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 15 में बीमारी की पुष्टि हुई। जिला अस्पताल में डेंगू के लिए 10 बिस्तर का वार्ड बनाया गया है लेकिन उसमें एक भी मरीज भर्ती नहीं है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के पास न तो डेंगू के जांच की व्यवस्था है और न ही प्लेटलेट्स की।
स्वास्थ्य महकमा किसी को डेंगू से मरने की बात स्वीकार नहीं कर रहा है। मछलीशहर, मीरगंज, धर्मापुर समेत जिले के कई अन्य इलाकों में डेंगू से पांच लोगों की मौत की बात सामने आई थी। इनको डेंगू होने की पुष्टि निजी चिकित्सालयों में की गई थी। इसी आधार पर स्वास्थ्य महकमा उनकी मौत की वजह डेंगू मानने को तैयार नहीं है। जिला अस्पताल में हर दिन बुखार से पीड़ित सैकड़ों मरीज आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में डेंगू के जांच और इलाज का उचित प्रबंध न होने के कारण डेंगू का संदेह होने पर लोग मरीजों को इलाहाबाद, लखनऊ या फिर बनारस लेकर चले जाते हैं।
मछलीशहर के मोलनापुर गांव निवासी शिवशंकर यादव (52) की जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। उनकी मौत हो गई। मीरगंज क्षेत्र के भटहर गांव के अधबरवा बस्ती निवासी राजेन्द्र प्रसाद (60) की इलाहाबाद में स्वरुपरानी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। धर्मापुर क्षेत्र के गौरा गांव निवासी विशाल (15), मुफ्तीगंज क्षेत्र के उतरगांवा बस्ती गोपी (5) व काजू (4) की मौत का कारण भी डेंगू बताया जा रहा है। मगर स्वास्थ्य महकमा इसे मानने से इनकार कर रहा है। जिला अस्पताल में संदेह होने पर 51 लोगों के नमूने जांच के लिए बीएचयू भेजे गए थे, जिनमें 15 में डेंगू की पुष्टि हुई। पीडितों का इलाज कराया जा रहा है।
रैपिड रिसपांस टीम का हुआ गठन
जौनपु्र। डेंगू और बुखार से पीड़ित लोगों की जांच करने और उन्हें तुरंत राहत दिलाने के लिए पांच सदस्यी रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। टीम सहायक मलेरिया अधिकारी, वरिष्ठ प्रयोगशाला प्राविधिक, क्षेत्र सेवक और वरिष्ठ क्षेत्र सेवक आदि को शामिल किया गया है। सूचना मिलने पर टीम मौके पर जाती है। पीड़ितों का नमूना इकट्ठा करती है। दाव वितरित करने के साथ, मच्छर दवाओं का छिड़काव भी कराया जा रहा है।
जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए दस बेड का आइसोलेशन बार्ड स्थापित किया गया। जांच के लिए एन.एस. वन. किट उपलब्ध है। अस्पताल में फीवर हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। बुखार से पीडित जो लोग आ रहे है। उनकी जांच कराई जा रही है। डेंगूं की पु ष्टि होने पर भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है। जिले में अभी तक डेंगूं से किसी की मौत नहीं हुई है।
डा. रामजी पांडेय
सीएमओ जौनपुर