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मिल बांटकर खाने वाला कभी दरिद्र नहीं होता

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जलालपुर। क्षेत्र के ग्राम छातीडीह में पंडित चंद्रेश मिश्र के आवास पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर पंडित ओमकार नाथ दुबे ने श्रीकृष्ण एवं सुदामा प्रसंग का मर्मस्पर्शी वर्णन किया। कहा कि मिल बांटकर खाने वाला कभी दरिद्र नहीं होता है। चावल खाकर सुदामा को कृष्म ने अतुल संपदा भेंट कर दी। जीव जब ईश्वर से प्रेम करता है तो ईश्वर उसे सुदामा बना देता है। जीविका अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए होती है जबकि आजीविका ईश्वर प्रदत्त है। ईश्वर में तन्मयता से सुदामा की तरह मनुष्य मुक्ति का मार्ग बना सकता है। आचार्य पंडित राजनाथ पांडेय, पंडित विनय मिश्र, वीरेंद्र शुक्ला, अवनीश दुबे, संतोष वैदिक ने शांति पाठ किया। राम सुमेर मिश्र, कुवरभारत सिंह, संजय सिंह, राजपत यादव, सुरेंद्र दुबे, कृष्ण प्रताप, प्रशांत, डॉ. राकेश मिश्र, मनीष शुक्ला, अश्वनी कुमार, कृष्ण कुमार, बृजवासी देवी, सुमन, आशा, सीता, उषा, दुर्गा देवी, लीलावती, प्यारी देवी, कुमारी देवी, बिंदु ,नीलम, सुरेखा, श्वेता आदि उपस्थित रही। आरती वंदन श्री भूषण मिश्र जड़ावती देवी ने किया।
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