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साफ सफाई की स्थिति हुआ बद से बदतर

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जौनपुर। शहर में साफ सफाई की स्थिति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। शहर के मुहल्लों से न तो नियमित रूप से कूड़ा उठान हो रहा है और न ही नालों को साफ किया जा रहा है। इसके लिए लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। धर्माकोल और प्लास्टिक लोग नालों में फेंक देते हैं। यही कारण है कि हाल ही में नगर पालिका को 20-25 लाख का चूना लगा है। सिपाह और चहारसू पर सीवर तोड़कर पानी का निकास कराया गया। शहर के सफाई कर्मचारी वैसे तो तकरीबन 300 हैं लेकिन इसमें से सैकड़ों कर्मचारी दोहरा लाभ कमा रहे हैं। वह नगर पालिका के साथ-साथ होटलों में भी काम कर रहे हैं।
सदर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव करते हैं। उनके विधानसभा क्षेत्र में न तो कूड़ा उठाने का सिस्टम ठीक हुआ और न ही सड़क किनारे कूड़ा डंपिंग बंद की गई। कूड़ा निस्तारण प्लांट तो है ही नहीं। खुले में शौचमुक्त होने के दावों की पोल भी खुल रही है। जिधर देखिए उस मोहल्ले में लोग खुले में शौच कर रहे हैं। जबकि दो अक्टूबर 2014 को देश के प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था। चार साल बीतने को है लेकिन कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा है। हुसेनाबाद में नाली जाम होने से पानी लग जाता है। ओलंदगंज में खुले में कूड़ा फेंका रहता है। कांशीराम सामुदायिक भवन के पीछे सड़क पर, मछलीशहर पड़ाव सड़क पर, तारापुर कालोनी में सड़क पर और तो और कचहरी के आस पास भी सड़कों पर कूडें पड़े रहते हैं। इसे उठाने वाला कोई नहीं है। कटघरा में कूड़ों से नाली पट गई है। इसके अलावा मोहल्लों की नालियां भी जाम हो गई है। सफाई कर्मचारी होटलों की सफाई कर ऊपरी आमदनी कर रहे हैं।
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- वार्ड 39, सफाई कर्मचारी 272
- नाले 31
- कूड़ा उठाने के लिए पांच छोटे वाहन, तीन बड़े वाहन
- मोहल्लों में 150 छोटे कंटेनर, 110 बड़े कंटेनर
इनसेट--
90 टन प्रतिदिन निकलता है कूड़ा
जौनपुर। शहर में प्रतिदिन तकरीबन 90 टन कूड़ा लोगों के घरों से निकलता है। कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था नगर पालिका के पास नहीं है। कुल्हनामऊ में कूड़ा निस्तारण प्लांट 10 वर्ष पहले शुरू किया गया था लेकिन बंद पड़ा है। यह हाल नगर विकास राज्यमंत्री के विधानसभा का है। और क्षेत्रों की तो बात ही नहीं की जा सकती।
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