बदलापुर / घनश्यामपुर। क्षेत्र के सिंगरामऊ निवासी पारस नाथ मौर्य शिक्षक की नौकरी से भले ही रिटायर हो गए हैं लेकिन आज ही विद्यालयों में छात्रों को तरास रहे हैं। नियमित रूप से बदलापुर और सिंगरामऊ के किसी विद्यालय में पहुंच कर छात्रों को पढ़ाने के बाद ही उन्हें चैन मिलता है। नियमित रूप से विद्यालय पहुंचना उनके दिनचर्या में शामिल है।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिंगरामऊ से वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त शिक्षक पारस नाथ मौर्य का मानना है कि शिक्षारूपी अंधकार आज भी कायम है। तमाम लोग आज भी शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। नैतिक एवं सैद्धांतिक मूल्यों की जड़ें हिल रही हैं। गुणवान को अज्ञानी प्रमाणित करने की स्पर्धा आज सर्वत्र व्याप्त है। इस दूर रहकर समाज को प्रकाश की तरफ ले चलने की जरूरत है। पारसनाथ का कहना है कि विद्यार्थी जीवन से ही मुझे पास पड़ोस के बच्चों को पढ़ाने का शौक था। वह शौक सेवानिवृत्त होने के बाद भी आज तक कायम है। क्षितिज पर शिक्षा रूपी ज्ञान के प्रकाश से छात्र छात्राओं को प्रकाशित कर उन्हें योग्य बनाना ही मेरा उद्देश्य है। उसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देना अपना दायित्व समझ रहा हूं। उन्होंने प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा सिंगरामऊ से अर्जित किया। वर्ष 1976 में बीटीसी की। सितंबर वर्ष 1989 में प्राथमिक विद्यालय करनपुर में शिक्षक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। इसके बाद विभिन्न विद्यालयों में शिक्षक पद के दायित्व का बखूबी निर्वहन किया। वह पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिंगरामऊ से जून 2015 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद से वह बदलापुर से सिंगरामऊ तक विभिन्न प्राथमिक, जूनियर विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को तालीम दे रहे हैं। वह सभी विषयों के माहिर हैं। रविवार को अथवा अन्य छुट्टियों में वह बहुत सारे बच्चों को घर पर ही पढ़ाते हैं।