जौनपुर। जिला कारागार में क्षमता से 21 गुना अधिक बंदी रखे गए हैं। जिससे जेल की व्यवस्था चरमरा गई है। साफ सफाई की व्यवस्था से लेकर भोजन और सुरक्षा व्यवस्था में भी तार तार हो रही है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जिला कारागार की व्यवस्था की पड़ताल की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। जिला कारागार को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है जिससे जेल अधीक्षक समेत बंदी रक्षकों के जर्जर आवासों की मरम्मत का काम भी नहीं कराया जा रहा है। जेल के अंदर बैरकों के बाहर बनाई गई बाउंड्रीवाल भी जर्जर हो गई है। अभी शुक्रवार को बैरक संख्या तीन की सर्किल बाउंड्री बारिश के दौरान ढह गई।
जिला कारागार में 320 बंदियों के रखने की क्षमता है जबकि मौजूदा समय में जिला कारागार में 2146 बंदी बंद हैं। क्षमता से सात गुना से अधिक बंदियों के चलते जेल की व्यवस्था चरमरा गई है। बंदियों को बैरकों में ठूस कर रखा गया है। जिससे बंदियों की नींद भी पूरी नहीं हो पाती। सुरक्षा के लिहाज से जेल में बंदी रक्षकों का 58 पद सृजित है लेकिन यहां 40 बंदी रक्षकों की तैनाती है। बंदी रक्षकों का 18 पद खाली पड़ा है। एक तरफ बंदियों की संख्या क्षमता से अधिक और बंदी रक्षकों की संख्या जरूरत से कम होने के चलते जेल प्रशासन को भी विभिन्न दुश्वारियों से गुजरना होता है। जेल प्रशासन का दावा है कि जेल के अंदर बंदियों के लिए भोजन और उनकी चिकित्सा सेवा में कोई कमी नहीं है। हकीकत जेल प्रशासन के दावे के उलट है। जिला कारागार में बंद बंदी ही सुविधाओं के अभाव में नहीं जी रहे बल्कि जेल के अधिकारी और कर्मचारी भी कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। जेल अधीक्षक और बंदी रक्षकों के आवास जर्जर हो चुके हैं। कई आवास ऐसे हैं जिनकी छतों से बारिश का पानी अंदर टपकता है। आवासों की मरम्मत इसलिए नहीं हो पा रही कि जेल को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है।
जिला कारागार में 320 बंदियों को रखने की क्षमता है जबकि जेल में 2146 बंदी रखे गए हैं। बंदियों की संख्या क्षमता से अधिक होने के चलते समस्या जरूर आ रही है फिर जेल की व्यवस्था ठीक चल रही है।-सुनील दत्त मिश्र, डिप्टी जेलर