जौनपुर। माध्यमिक विद्यालयों में 103 सहायक अध्यापकों की अल्पकालिक रूप से शैक्षणिक सत्र के लिए की गई नियुक्ति के मामले में शासन ने जांच बैठा दी है। सचिव माध्यमिक शिक्षा संध्या तिवारी ने मामले की जांच जेडी वाराणसी को सौंपी है। उन्होंने दो माह के भीतर आख्या शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जांच की भनक पर सहायक अध्यापकों में खलबली मच गई है।
जिले के 50 से अधिक विद्यालयों में अंशकालिक सहायक अध्यापकों की शैक्षणिक सत्र के लिए नियुक्ति का अनुमोदन पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक उमेश शुक्ल ने किया था। उनके बाद आए जिला विद्यालय निरीक्षक डा. ब्रजेश मिश्र ने 23 जून को इन 103 शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभार से रोक दिया। जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस संबंध में शासन को एक पत्र भेजा। जिसमें लिखा कि नियुक्तियां उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम की धारा 16 ई (11) के अंतर्गत की गई है। शैक्षिक सत्र समाप्ति के बाद ऐसी नियुक्तियों को बनाए रखना नियम के विरुद्ध है। इस पर सचिव माध्यमिक शिक्षा संध्या तिवारी ने सात अगस्त को मामले की जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक को सौंप दी। उनसे दो माह में जांच आख्या मांगी है और तब तक शिक्षकों का वेतन रोक दिया है।
अध्यापक का पद खाली होने पर अध्यापक के चयन की सूचना आयोग नहीं भेजी जाती है। ऐसे में आयोग नियुक्ति कर अध्यापकों को उस कालेज में नहीं भेजता। उधर प्रबंधक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारी और दलाल मिलकर वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की धारा 16 के तहत हाईकोर्ट में वाद दायर कराते हैं। जहां से जिला विद्यालय निरीक्षक को निस्तारण का आदेश किया जाता है। इसी का सहारा लेकर नियुक्ति कर दी जाती है। नियुक्ति पत्र में एक सत्र या आयोग से आने तक लिखा जाना चाहिए लेकिन सिर्फ आयोग से आने तक लिखा जाता है। शिक्षकों की नियुक्ति की तकरीबन 80 पत्रावलियां जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में अनुमोदन के लिए पड़ी हैं लेकिन जांच शुरू होने के कारण उनका अनुमोदन रुक गया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने 103 अध्यापकों का वेतन रोककर संबंधित प्रकरण की जानकारी दी है। इसे गंभीरता से लेते हुए जांच वाराणसी मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक को सौंपी गई है।
संध्या तिवारी
सचिव
माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश