बदलापुर/घनश्यामपुर। भारत छोड़ो आंदोलन की चिंगारी समूचे देश में फैल गई थी। जौनपुर जनपद भी आंदोलन की उस चिंगारी से अछूता नहीं था। युवाओं की टोली अंग्रेजी हुकूमत से मुकाबले को बेचैन हो उठी थी। जो जहां था वहीं ब्रितानी सरकार को पंगु बनाने में लग गया। बक्शा और बदलापुर के नौजवानों ने डाकखाना लूटने के लिए जिला मुख्यालय से बदलापुर का संपर्क काटने के लिए धनियामऊ का पुल तोड़ दिया था।
बक्शा और बदलापुर आदि इलाके के युवकों ने डाकखाना लूट की योजना बनाई। इसको सफल बनाने के लिए जिला मुख्यालय और बदलापुर का संपर्क तोड़ने का फैसला लिया गया। धनियामऊ में नाले पर बने पुल को तोड़ने कर यह काम किया जा सकता था। 15 अगस्त 1942 की रात इसकी योजना तैयार की गई। अगले दिन टीम के कुछ सदस्यों को जौनपुर और बक्शा की तरफ से आने वाली फोर्स को रास्ते में रोकने की जिम्मेदारी दी गई। एक टोली को बदलापुर डाकखाने को लूटने और तीसरी टोली को पुल तोड़ने की जिम्मेदारी थी। सेनानियों की टीम जब बक्शा थाने पहुंची तो पता चला वहां भारी फोर्स तैनात है। सभी वापस धनियामऊ पुल पर पहुंच गए। पुल तोड़ने का काम शुरू हो गया। इसी बीच जौनपुर की ओर से फोर्स भी आ गई। स्वतंत्रता सेनानियों और सिपाहियों से मुकाबला शुरू हो गया। अंग्रेजों ने गोली चलाई तो उसका मुकाबला सेनानियों ने ईंट-पत्थर और लाठी से किया। अंग्रेजों की गोली लगने से रामपदारथ चौहान, राम निहोर , जमींदार सिंह, रामअधार सिंह शहीद हो गए जबकि रामभरोस, भोला, बचई मिश्र, छत्रपाल सिंह समेत दर्जन भर लोग घायल हो गए। अंधाधुंध चल रही गोली चला रहे एक इंस्पेक्टर को सेनानियों ने बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया, जिसकी कुछ दिनों बाद मौत हो गई। धनियांमऊ पुल कांड में शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों की याद में घटना स्थल के निकट ही शहीद समारक का निर्माण कराया गया है जो आज उपेक्षा का शिकार है। शहीद स्मारक पर प्रति वर्ष 16 अगस्त को शहीद मेला लगता है। इसी अवसर पर यहां एनसीसी के कैडेट और समाज सेवियों की ओर से साफ सफाई की जाती है। बाकी समय शहीद स्मारक झाडिय़ों से घिरा रहता है।
बदलापुर/घनश्यामपुर। अमर शहीदों की स्मृति में धनियांमऊ में बने शहीद स्मारक का शिलान्यास 24 नवम्बर वर्ष 1991 को तत्कालीन कारागार राज्य मंत्री उमानाथ सिंह ने किया था । लेकिन आज यह शहीद स्तंभ उपेक्षा का शिकार है। शिलान्यास के दौरान शहीदो के नाम पुस्तकालय तथा अस्पताल निर्माण कराने की घोषणा की गई थी। लेकिन पुस्तकालय और अस्पताल का निर्माण आजतक नहीं हो सका। स्मारक घास फूस से घिरा है। एसडीएम रमापति राम बिन्द का कहना है कि शहीद स्मारक की साफ सफाई करायी जायेगी । इसके लिए आज ही खण्डविकास अधिकारी से वार्ता कर लिया है।