थानागद्दी/ केराकत। झूला वनस्पति कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया से कंपनी के सैकड़ों कर्मचारियों के सामने संकट खड़ा हो गया है। रिसीवर द्वारा कंपनी को टेकओवर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दो महीने से उत्पादन ठप होने से कंपनी को 50 लाख की चपत लग रही है। इसकी श्रीलंका में स्थापित ईकाई में भी एक वर्ष से उत्पादन ठप है।
केराकत क्षेत्र के नाऊपुर में जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज ने 1990 में फैक्ट्री की स्थापना की। तब रोजाना 25 टन तेल का उत्पादन होता था। कंपनी लगातार तरक्की करती गई और उत्पादन 21 हजार टन रोजाना तक पहुंच गया। इस कंपनी में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 700 अधिकारी, कर्मचारी कार्यरत हैं। मलेशिया और सिंगापुर से आयातित पाम आयल से वनस्पति एवं रिफाइंड आयल बनता था। वित्तीय कमी से जूझ रही इस इंडस्ट्रीज को पाम आयल निर्यातक देशों ने आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति कम कर दी तो उत्पादन घटता चला गया। उत्पादन प्रतिदिन 400 टन तक गिर गया था। प्रदूषण लाइसेंस की अवधि समाप्त होने, वित्तीय कमी से दो महीने से उत्पादन ठप्प करने से नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल ने जेवीएल के विरुद्ध कारपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया प्रारंभ करने का आदेश दे दिया। अंतरिम समाधान प्रोफेशनल के रूप में अभिषेक गुप्त को नामित कर दिया गया है। रविवार को भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड के प्रतिनिधि के रूप में अभिषेक गुप्ता ने नाऊपुर स्थित झूला कंपनी के अधिकारियों के साथ कंपनी के मुख्य कार्यालय वाराणसी के तिलमापुर स्थित कंपनी परिसर में फैक्ट्री के दोबारा संचालन के उपायों पर चर्चा की। उसमें कर्मचारियों का वेतन भुगतान के मुद्दे पर चर्चा हुई। रिसीवर टीम के अधिकारी कंपनी संचालित करने के मुद्दे पर सहमत दिखे। इसके बाद कर्मचारियों में आशा की किरण जगी है। उनका कहना है कि ऐसी संभावना है कि कंपनी पुन: रिसीवर की देखरेख में अपना उत्पादन प्रारंभ करेगी। वैसे भी कंपनी दो माह से बंद चल रही है। बैठक में मुख्य रूप से महाप्रबंधक एसएनपी सिन्हा, जीएम एचआर अजय सिंह, डीजीएम कमर्शियल एलडी मुनि, प्रोडकशन मैनेजर एसएस यादव तथा पर्सनल मैनेजर ध्रुव तिवारी उपस्थित रहे।
कंपनी अभी भी तमाम संभावनाओं को टटोल रही है। इसको लेकर बैठक हुई है। सार्थक परिणाम शीघ्र ही सामने आ सकता है।
ध्रुव तिवारी, कार्मिक प्रबंधक झूला वनस्पति कंपनी