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आयुर्वेदिक अस्पताल में बैठने से डरते है चिकित्सक

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सिकरारा। बाजार स्थित राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो गया है। हालत यह है कि यहां तैनात डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मी अब इसके कमरों में बैठने से कतराते हैं। उन्हें कभी भी बड़ा हादसा होने का डर सताता है।
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जौनपुर-इलाहबाद राज मार्ग पर स्थित सिकरारा बाजार के दक्षिणी छोर पर बने इस अस्पताल का भवन पांच दशक पुराना है। तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट बोर्ड सदस्य बटेश्वर नाथ उपाध्याय के प्रस्ताव पर यह भवन वित्तीय वर्ष 1967-68 में बनाया गया था। यहां तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. अखंड प्रताप सिंह बताते हैं कि अस्पताल के भवन की छत पूरी तरह से जर्जर हो गई है। इन दिनों कमरों के अंदर बारिश का दृश्य दिखाई देता है। कमरे के अंदर बैठ कर रोगी देखना दवा देना खतरनाक लगता है। कभी भी कोई भयानक हादसा होने की आशंका से सभी भय ग्रस्त रहते हैं। केवल मुख्य द्वार की किवाड़ को छोड़ कर सारी खड़कियों दरवाजों के लकड़ी के पल्ले दीमक खा गए हैं। जिसके कारण यह रात में और भी असुरक्षित हो जाता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल की मरम्मत के लिए विभाग को पत्र लिख कर धन आवंटित करने की मांग की थी। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी जौनपुर ने अधिशासी अभियंता यूपी सिडको जौनपुर को 24 मार्च 2017 को इस अस्पताल के मरम्मत कार्य के लिए 3,93,595 रुपये आवंटित कर मरम्मत कार्य करने का निर्देश दिया था। उनके उस धन को अपर्याप्त बताते हुए उन्होंने दूसरा स्टीमेट 6 लाख 70 हजार का भेजा जो अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ है। उन्होंने 10 अप्रैल 18 को फिर से जिलाधिकारी को पत्र लिख कर मरम्मत कार्य कराने का निवेदन किया है जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। डा. सिंह बताते हैं कि यह अस्पताल दवाओं तथा अन्य सुविधा से तो पूर्ण है परंतु भवन जर्जर होने के कारण दवाओं का रख रखाव, कागजात की हिफाजत में परेशानी हो रही है। रोगी यहां आने से कतराते हैं। पूर्व प्रधान सुभाष सिंह बताते हैं कि यदि इस अस्पताल की मरम्मत जल्द नहीं कराई गयी तो कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
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