मछलीशहर। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में माना गया है। शास्त्रों में गुरु पूजन के कारण इस पर्व को अत्यंत पवित्र माना गया है। इस बार गुरु पूर्णिमा 27 को पड़ रही है। लोगों द्वारा पर्व को मनाने के लिए तैयारी की जा रही हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन ही आदि गुरु वेद व्यास का जन्म हुआ था। वैसे तो देश में अनेक विद्वान हुए लेकिन उनमें वेद व्यास का महत्वपूर्ण स्थान है। महर्षि वेद व्यास को चारों वेदों के रचयिता के रूप में माना जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन वेद व्यास जी की पूजा की जाती है। प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे। तो वे गुरु पूर्णिमा के दिन श्रद्धापूर्वक अपनी शक्ति और क्षमता के अनुसार गुरु को दक्षिणा देकर कृतकृत्य होते थे। वास्तव में सर्वप्रथम वेदों का ज्ञान देने वाले महर्षि व्यास ही हैं। इसलिए इन्हें आदि गुरु कहा गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन प्रात: जल्दी उठकर घर की सफाई करें। स्नानादि के पश्चात् साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर पटिए पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर 12-12 रेखाएं बनाकर व्यास-पीठ बनाएं। इसके बाद इस मंत्र का जाप करके पूजन का संकल्प लें। फिर व्यासजी, ब्रह्मा, शुकदेव, गोविंद स्वामी और शंकराचार्य के नाम या मंत्र से पूजा का आवाहन करें। अंत में अपने गुरु अथवा उनके चित्र की पूजा करके उन्हें यथा योग्य दक्षिणा प्रदान करें। यदि आप विधिवत पूजा करने में असमर्थ हैं तो इस दिन कम से कम अपने गुरु या फिर जिस इष्ट देवता को आप मानते हैं, उनके चरण स्पर्श करें। उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार उपहार या दक्षिणा भेंट करें।