सोमवार को हरिशयनी एकादशी तिथि होने के कारण श्रीहरि विष्णु का पूजन और आषाढ़ मास का अंतिम सोमवार होने के कारण भगवान शंकर के भी पूजन का अद्भुत संयोग भक्तों को मिला। सोमवार को जहां शिवालयों पर जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की भीड़ रही, वहीं एकादशी तिथि पर श्रीहरि का भी पूजन हुआ। मंगलवार से चतुर्मास आरंभ होगा। चतुर्मास में श्रीहरि चार माह तक शयन करेंगे और कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी जिसे हरि प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं ,उस दिन जागते हैं । उनके शयनकाल का समय चतुर्मास कहा जाता है। इस प्रकार दोनों देवताओं के एक साथ पूजन का अजब का अद्भुत संयोग मिला है। सोमवार को श्रीहरि और हर अर्थात शिवजी दोनों का पूजन कर भक्तों ने एक साथ पुण्य फल अर्जित किया।